मुंबई : कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) दो अक्टूबर को मुंबई में विरोध प्रदर्शन करेगी। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगा है। इस प्रदर्शन की घोषणा तब की गई जब एक अखबार में खबर छपी थी कि दो चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसले पर आपत्ति जताई थी। हालांकि, बाद में चुनाव आयोग ने स्पष्टीकरण जारी कर कहा कि अंतिम निर्णय बहुमत से लिया गया था।
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इस मुद्दे को लेकर विपक्षी पार्टियों ने भी एक दिन पहले इंडिया गठबंधन की बैठक की और चुनाव आयोग के खिलाफ संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया। इससे पहले 25 सितंबर को सीजेपी फाउंडर अभिजीत दिपके ने अपने सहयोगी सौरव दास और आशुतोष रंका के साथ तीन मांगें रखी थीं। उनकी पहली मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने की है। दूसरी मांग स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) को रोकने और जनवरी 2025 की वोटर लिस्ट बहाल करने से जुड़ी है। तीसरी मांग चुनाव आयोग में सुधार के तहत 2023 के कानून को रद्द करने की है, जिसके तहत सीईसी को विशेष कानूनी सुरक्षा मिली हुई है।
पुलिस की अनुमति और जेल भरो आंदोलन की चेतावनी
फिलहाल मुंबई पुलिस ने सीजेपी को प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है। प्रदर्शन मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रस्तावित है। सीजेपी ने कहा है कि अगर पुलिस इजाजत नहीं देती है तो भी विरोध प्रदर्शन होकर रहेगा। मुंबई पुलिस का कहना है कि 2013 के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक उन्हें शिवाजी पार्क में भीड़ जमा करने की अनुमति देने का अधिकार नहीं है। इस पर सीजेपी फाउंडर अभिजीत दिपके ने सरकार पर विरोध को दबाने का आरोप लगाया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अगर सीजेपी को विरोध करने का अधिकार नहीं दिया गया, तो पार्टी जेल भरो आंदोलन शुरू करेगी। सीजेपी के अनुसार, पहला विरोध प्रदर्शन शिवाजी पार्क के पास गेट नंबर 6 पर होगा और उसके बाद बेंगलुरु, गोवा, कोलकाता, पटना और रांची में भी ऐसे प्रदर्शन किए जाएंगे। पार्टी का कहना है कि अक्टूबर के आखिर तक यह आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच जाएगा।
नेताओं के बीच जुबानी जंग
दूसरी ओर, महाराष्ट्र के मंत्री और बीजेपी नेता नितेश राणे ने गुरुवार को आरोप लगाया कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के संस्थापक अभिजीत दिपके ने छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान किया है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के विरोध-प्रदर्शन से जुड़ी एक पोस्ट में योद्धा-राजा की मूर्ति के नीचे कॉकरोच दिखाए गए थे। नितेश राणे के अनुसार, इसका मतलब है कि स्वराज के लिए लड़ने वाले मावलों को कॉकरोच के रूप में दिखाया गया है, जिस पर विवाद खड़ा हो गया है।





