पटना हाईकोर्ट ने तलाक के एक केस में अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ पति-पत्नी के लंबे समय से अलग रहना तलाक का आधार नहीं माना जा सकता। लेकिन कोर्ट ने यह भी कहा कि पति बिना उचित कारण के लंबे समय से पत्नी से अलग रहता है, तो यह मानसिक प्रताड़ना का आधार बनता है। मोना कुमारी और सुनील कुमार से जुड़े फैमिली कोर्ट के फैसले को न्यायमूर्ति बिबेक चौधरी और न्यायमूर्ति राणा विक्रम सिंह की खंडपीठ ने पलटते हुए पत्नी के पक्ष में फैसला सनाया।
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मामला बेगूसराय की मोना कुमारी और भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त जवान सुनील कुमार से जुड़ा है। दोनों की शादी वर्ष 2007 में हुई थी। इनका एक बेटा भी है. पत्नी का आरोप है कि शादी के बाद से ही पति उसे अपने साथ रखन में रुचि नहीं दिखाते थे।
पत्नी ने पति पर चरित्र को लेकर आरोप लगाने और गाली-गलौज करने का आरोप लगाया। उसके मुताबिक, उसे लगातार मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़। फरवरी 2013 से दोनों अलग रहने लगे। पत्नी का कहना था कि पति ने उसके और बच्चे के भरण-पोषण की भी सुध नहीं ली। इसके बाद मोना ने तलाक के लिए लखीसराय फैमिली कोर्ट का रुख किया।
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लखीसराय परिवार न्यायालय ने 15 जून 2024 को पत्नी की तलाक याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने पर्याप्त साक्ष्य नहीं होने का हवाला दिया था। इसके बाद मोना कुमारी ने पटना हाईकोर्ट में अपील दाखिल की। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति बिबेक चौधरी और न्यायमूर्ति राणा विक्रम सिंह की खंडपीठ ने की।
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान पति को पेश होने के लिए कई बार नोटिस भेजने का आदेश दिया गया। इसके बावजूद व अदालत में उपस्थित नहीं हुए। कोर्ट के आदेश पर समाचार पत्रों में भी विज्ञापन प्रकाशित कराया गया। इसके बाद भी पति हाईकोर्ट में पेश नहीं हुए।
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हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों के बीच 2013 से वैवाहिक संबंध प्रभावी रूप से समाप्त हैं। हालांकि, केवल लंबे समय तक अलग रहने को अपने आप में तलाक का आधार नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पति यदि बिना कारण लंबे समय तक पत्नी से अलग रहता है और उसे वैवाहिक जीवन से वंचित रखता है, तो परिस्थितियों के आधार पर यह मानसिक क्रूरता का आधार बन सकता है।
खंडपीठ ने फैमिली कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया। इसके साथ ही पत्नी की अपील स्वीकार करते हुए तलाक की डिक्री प्रदान कर दी। कोर्ट के इस फैसले के बाद मोना कुमारी और सुनील कुमार के बीच कानून तलाक हो गया।
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