रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने मैट्रिक/इंटर प्रशिक्षित दुमका के विभिन्न सरकारी स्कूलों के प्राथमिक शिक्षकों से जुड़ी वेतन विसंगति के मामले में आदेश दिया है। हाइकोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने दुमका जिले के 44 शिक्षकों की याचिका को निष्पादित कर दिया। कोर्ट ने राज्य सरकार को पूर्व में दिए गए फैसले के अनुरूप उन्हें लाभ देने का निर्देश दिया है. प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता अभिजीत कुमार सिंह ने पक्ष रखा।
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याचिकाकर्ताओं ने छठे वेतन पुनरीक्षण के तहत एक जनवरी 2006 से 16,290 रुपये का न्यूनतम एंट्री पे निर्धारित करने और उसके आधार पर वेतन पुनर्निर्धारण और बकाया वेतन समेत अन्य परिणामी लाभ देने की मांग की थी। उनका कहना था कि वे वर्ष 2006 से पहले मैट्रिक/इंटर प्रशिक्षित प्राथमिक शिक्षक के रूप में सेवा में नियुक्त हुए थे।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि इस मुद्दे पर हाईकोर्ट पहले ही एक मामले (डब्ल्यूपीएस संख्या 5897/2014) और संबद्ध मामलों में 27 नवंबर 2025 को फैसला सुना चुका है। राज्य सरकार की ओर से भी इस बात को स्वीकार किया गया कि वर्तमान मामले का मुद्दा उसी फैसले के समान है।
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इसके बाद अदालत ने कहा कि वर्तमान मामला पूर्व के फैसले से पूरी तरह आच्छादित है। इसलिए याचिका का निपटारा उसी निर्णय और निष्कर्ष के आधार पर करते हुए प्रतिवादियों को आठ सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ताओं को समान लाभ देने का निर्देश दिया गया।
हालांकि राज्य की ओर से बताया गया कि पूर्व के फैसले के खिलाफ एक अपील (एलपीए) दायर की गयी है. इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि अपील में राज्य सरकार सफल होती है, तो डिवीजन बेंच द्वारा पारित आदेश इन याचिकाकर्ताओं के मामले में भी लागू होगा।
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