झारखंड में रूबेला का दूसरा मामला, सिमडेगा में 24 घंटे में दो बच्चियां संक्रमित, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

सिमडेगा: झारखंड में रूबेला संक्रमण का एक और मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में आ गया है। सिमडेगा जिले के ठेठईटांगर प्रखंड में 24 घंटे के भीतर दो बच्चियों में रूबेला संक्रमण की पुष्टि हुई है। मंगलवार को सामने आया

झारखंड में रूबेला

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 सिमडेगा: झारखंड में रूबेला संक्रमण का एक और मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में आ गया है। सिमडेगा जिले के ठेठईटांगर प्रखंड में 24 घंटे के भीतर दो बच्चियों में रूबेला संक्रमण की पुष्टि हुई है। मंगलवार को सामने आया दूसरा मामला ताराबोगा नदीपार टोली की बच्ची का है। इससे पहले सोमवार को इसी प्रखंड के कुड़पानी मुंडाटोली गांव की 10 वर्षीय बच्ची में संक्रमण की पुष्टि हुई थी। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों मामलों के बाद प्रभावित इलाकों में निगरानी और MR टीकाकरण अभियान तेज किया गया है।
24 घंटे में दो मामले, स्वास्थ्य विभाग ने बढ़ाई निगरानी
ठेठईटांगर प्रखंड में रूबेला के दो मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में सर्विलांस बढ़ा दिया है। स्वास्थ्य टीमें बच्चों में संदिग्ध लक्षणों की पहचान के साथ टीकाकरण की स्थिति की भी जांच कर रही हैं।
पहला मामला सामने आने के बाद ही क्षेत्र में विशेष टीकाकरण अभियान शुरू किया गया था। अब दूसरे मामले की पुष्टि के बाद निगरानी और वैक्सीनेशन गतिविधियों को और तेज किया गया है।
सैंपल जांच के बाद हुई संक्रमण की पुष्टि
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रभावित गांवों से बच्चों के सैंपल जांच के लिए रांची स्थित RIMS भेजे गए थे। जांच के बाद एक बच्ची में रूबेला संक्रमण की पुष्टि हुई। इसके बाद मंगलवार को दूसरे बच्चे की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई।
स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, क्षेत्र में पहले से मीजल्स यानी खसरे के संदिग्ध और पुष्ट मामलों की निगरानी की जा रही थी। इसी क्रम में सैंपल जांच के दौरान रूबेला संक्रमण का मामला सामने आया।
MR वैक्सीनेशन पर जोर, प्रभावित इलाकों में अभियान तेज
दोनों मामलों के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग का फोकस बच्चों के MR यानी Measles-Rubella वैक्सीनेशन पर है। प्रभावित इलाकों में टीकाकरण की स्थिति की जांच की जा रही है और जिन बच्चों का टीकाकरण अधूरा है, उन्हें वैक्सीन देने की प्रक्रिया तेज की गई है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से पूरे राज्य में MR टीकाकरण और निगरानी पर जोर दिया जा रहा है। सिमडेगा में विशेष रूप से प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य टीमों की गतिविधियां बढ़ाई गई हैं।
क्या है रूबेला?
रूबेला एक संक्रामक वायरल बीमारी है, जिसे आम तौर पर जर्मन खसरा भी कहा जाता है। यह खसरे से अलग वायरस के कारण होने वाला संक्रमण है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाली श्वसन बूंदों के जरिए वायरस फैल सकता है।
WHO के मुताबिक, बच्चों में रूबेला संक्रमण अक्सर हल्का होता है। इसके प्रमुख लक्षणों में हल्का बुखार, चेहरे और शरीर पर लाल चकत्ते तथा गर्दन या कानों के पीछे लिम्फ नोड्स में सूजन शामिल हो सकती है।
गर्भवती महिलाओं के लिए क्यों गंभीर है रूबेला?
रूबेला संक्रमण को लेकर सबसे बड़ी चिंता गर्भावस्था के दौरान होती है। खासकर गर्भावस्था के शुरुआती चरण में संक्रमण होने पर वायरस भ्रूण तक पहुंच सकता है और Congenital Rubella Syndrome (CRS) का खतरा पैदा हो सकता है।
WHO के अनुसार, शुरुआती गर्भावस्था में रूबेला संक्रमण से गर्भपात, भ्रूण की मृत्यु या बच्चे में जन्मजात विकृतियां हो सकती हैं। CRS से सुनने की क्षमता में कमी, आंखों और हृदय से जुड़ी जन्मजात समस्याएं समेत अन्य गंभीर दिक्कतें हो सकती हैं।
लक्षण दिखें तो क्या करें?
रूबेला के लक्षण कई बार हल्के होते हैं, इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर इसकी पुष्टि करना मुश्किल हो सकता है। चेहरे से शुरू होकर शरीर पर फैलने वाले लाल चकत्ते, हल्का बुखार, आंखों में लालिमा और लिम्फ नोड्स में सूजन जैसे लक्षण दिखने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
संदिग्ध संक्रमण की स्थिति में मरीज को विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं से दूर रखना और स्वास्थ्य विभाग की सलाह का पालन करना जरूरी है।
टीकाकरण है सबसे प्रभावी बचाव
रूबेला से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका टीकाकरण है। WHO के अनुसार, रूबेला वैक्सीन आम तौर पर MR, MMR या संबंधित संयोजन वैक्सीन के रूप में दी जाती है और टीकाकरण से बीमारी से सुरक्षा मिलती है।
सिमडेगा में दो मामलों के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने भी टीकाकरण अभियान और निगरानी को तेज किया है। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों के टीकाकरण रिकॉर्ड की जांच करानी चाहिए और यदि कोई डोज छूटी है तो स्वास्थ्यकर्मी की सलाह के अनुसार उसे पूरा कराना चाहिए।
झारखंड में स्वास्थ्य विभाग की नजर
सिमडेगा के ठेठईटांगर में कम समय के भीतर दो मामलों के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए है। प्रभावित इलाकों में एक्टिव केस सर्च, निगरानी और टीकाकरण गतिविधियां जारी हैं।
फिलहाल दो मामलों के आधार पर इसे व्यापक प्रकोप कहना जल्दबाजी होगी। हालांकि, एक ही प्रखंड में कम समय के भीतर दो मामले सामने आने के कारण निगरानी और टीकाकरण को लेकर स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता महत्वपूर्ण हो गई है।
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