रांची: सराफ परिवार के तत्वावधान में महाराजा अग्रसेन भवन, रांची में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत गीता कथा अमृत महोत्सव उमंग, उल्लास एवं भक्तिमय वातावरण के बीच भव्य रूप से संपन्न हुआ। सातवें एवं अंतिम दिवस जगन्नाथधाम के सुप्रसिद्ध कथावाचक एवं व्यास महाराज दिनेश जी भारद्वाज ने व्यास पीठ से भगवान श्रीकृष्ण के परम भक्त सुदामा चरित्र का भावपूर्ण एवं विस्तृत वर्णन किया। कथा के उपरांत हवन एवं पूर्णाहुति के साथ सात दिवसीय धार्मिक आयोजन का विधिवत समापन हुआ।
अंतिम दिवस कथा स्थल का विशेष रूप से भव्य एवं अलौकिक श्रृंगार किया गया था। पुष्पों से की गई आकर्षक सजावट श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। सजीव झांकियों के माध्यम से कथा प्रसंगों का सुंदर एवं भावपूर्ण चित्रण किया गया, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा
व्यास महाराज दिनेश भारद्वाज ने सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता संसार के लिए प्रेम, अपनत्व, निस्वार्थ भाव और सच्ची मित्रता का अनुपम उदाहरण है। अत्यंत निर्धन होने के बावजूद सुदामा ने कभी भगवान से अपनी गरीबी दूर करने की याचना नहीं की। पत्नी के आग्रह पर वे भगवान श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे और अपने बालसखा के लिए चिउड़ा लेकर गए। व्यास महाराज ने भावपूर्ण प्रसंग सुनाते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने निर्धन मित्र सुदामा का जिस प्रेम और आत्मीयता से स्वागत किया, वह भगवान की भक्तवत्सलता को दर्शाता है।
श्रीकृष्ण ने सुदामा के चरण स्वयं धोए और उनके प्रेम से लाए गए तुच्छ से उपहार को भी अत्यंत प्रेमपूर्वक स्वीकार किया। सुदामा जब द्वारका से लौटे तो भगवान ने बिना मांगे ही उनका जीवन सुख-समृद्धि से भर दिया। उन्होंने कहा कि भगवान के दरबार में धन-दौलत नहीं, बल्कि भक्त की भावना और प्रेम सबसे महत्वपूर्ण है। कथा के दौरान व्यास महाराज के सुमधुर भजनों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमते रहे। भगवान के जयकारों से कथा स्थल गुंजायमान रहा।
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इसके बाद विधिवत हवन एवं पूर्णाहुति का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने आहुति देकर विश्व कल्याण, सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की। सामूहिक आरती के पश्चात श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।महाप्रसाद में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद सात दिवसीय कथा के समापन अवसर पर सराफ परिवार की ओर से महाप्रसाद का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में महिलाओं, पुरुषों एवं श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण किया।
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