रांची। झारखंड हाई कोर्ट से सीएम हेमंत सोरेन को राहत नहीं मिली है। अदालत ने जमीन से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुनवाई पर रोक लगाने की मांग को खारिज कर दिया है।
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हेमंत सोरेन ने कोर्ट में अर्जी देकर कहा था कि उनके खिलाफ केस आगे बढ़ाने से पहले जरूरी सरकारी मंजूरी नहीं ली गई है। उनका कहना था कि इस मामले में पुराने कानून यानी सीआरपीसी की धारा 197 के तहत मंजूरी जरूरी है। वहीं, ED ने इसका विरोध करते हुए कहा कि मौजूदा मामले में BNS की धारा 218 लागू होगी और 120 दिन में फैसला नहीं होने पर मंजूरी को मिली हुई माना जा सकता है।
हाईकोर्ट ने कहा कि इस समय सिर्फ मंजूरी नहीं मिलने के आधार पर पूरे ट्रायल को रोकना सही नहीं होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि अभी यह तय करना जल्दबाजी होगी कि सोरेन के खिलाफ लगाए गए आरोप उनके सरकारी काम का हिस्सा थे या नहीं। इस सवाल पर ट्रायल के दौरान सामने आने वाले दस्तावेज और सबूत महत्वपूर्ण होंगे। कोर्ट ने कहा कि अभी मामले में आगे की कार्रवाई रोकने के लिए पहली नजर में पर्याप्त आधार नहीं बनता।
19 सितंबर को चार्ज तय करने की तारीख
सोरेन की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि ED केस में 19 सितंबर 2026 को आरोप तय करने की तारीख रखी गई है। इसी वजह से उन्होंने हाईकोर्ट से तुरंत राहत की मांग की थी। हाईकोर्ट ने साफ किया कि उसके आदेश में की गई टिप्पणियां सिर्फ आगे की कार्रवाई पर रोक की अर्जी तक सीमित हैं। ट्रायल कोर्ट इन टिप्पणियों से प्रभावित हुए बिना मामले को कानून के मुताबिक आगे बढ़ाएगा।
क्या है मामला?
मामला रांची की विशेष PMLA अदालत में चल रहे उस केस से जुड़ा है, जिसमें ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगाए हैं। यह पूरा विवाद रांची के बड़गाईं अंचल में 8.86 एकड़ जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण और दस्तावेजों में हेरफेर से जुड़ा है। सोरेन की डिस्चार्ज अर्जी को विशेष अदालत ने 8 जून 2026 को खारिज कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया था।
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