केन्द्रीय सरना समिति,विभिन्न आदिवासी/ जनजाति सामाजिक संगठनों की प्रेस वार्ता

केन्द्रीय सरना समिति एवं विभिन्न आदिवासी/ जनजाति सामाजिक संगठनों के द्वारा प्रेस क्लब रांची में संयुक्त रूप से प्रेस वार्ता हुई। प्रेस वार्ता में व्यक्ताओं ने कहा कि मुख्य ईसाइयों के द्वारा चर्च/ गिरजा घरों में करम देवता को गाड़ कर अपमानित और खिलवाड़ किये

केन्द्रीय सरना समिति

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केन्द्रीय सरना समिति एवं विभिन्न आदिवासी/ जनजाति सामाजिक संगठनों के द्वारा  प्रेस क्लब रांची में संयुक्त रूप से प्रेस वार्ता हुई।  प्रेस वार्ता में व्यक्ताओं ने  कहा कि मुख्य   ईसाइयों के द्वारा चर्च/  गिरजा घरों में करम देवता को गाड़ कर  अपमानित और खिलवाड़ किये जा रहे के संबंध में ईसाइयों द्वारा लिखित पुस्तक खड़िया धर्म और संस्कृति का विश्लेषण एवं आदिवासी मिस्सा संग्रह मे कहा गया है कि वैटिंकन विश्व सभा के निर्देशन के आधार पर हमने अपने आदिवासी त्योहारों का अध्ययन एवं संशोधन  किया और उन्हें अब हम ख्रीस्तीय ढंग से अर्थात ईसाई विधि से सरहुल और करम आदि त्योहारों को मना सकते आज उसी निर्देशन के अनुसार हम आदिवासियों का आराध्य देव करम देवता को चर्च/गिरजा घरों के अंदर बालू का टिना में खड़ा कर हमारे आराध्य देव करम देवता को अपमानित कर रहे हैंं।
ज्ञात हो कि आदिवासियों का पर्व त्यौहार संस्कार संस्कृति परंपरागत रुढ़ि प्रथा पूजा पद्धति इत्यादि को त्यागने के बाद आदिवासी धर्म पूजा पद्धति इत्यादि से इन्हें कोई   लेना-देना नहीं रह जाता है किंतु आदिवासी बने रहने के लिए आस्था से नहीं बल्कि दिखावा के लिए आदिवासियों का पर्व  त्योहारों को मनाने का ढोंग कर रहे हैं।
हम आदिवासी समाज भादो एकादशी के दिन  करम देवता को पूरे विधि विधान और आस्था और उल्लास के साथ अपने भाई बहनों माता-पिता के साथ रात भर सामूहिक नृत्य संगीत करते हैं उसको भी ईसाइयों के द्वारा  कहा जाता है कि करम पूजा की रात को नाचते गाते हैं और इस अवसर पर लड़का लड़की स्त्री पुरुष जिस किसी के साथ अपना आचरण खराब करते हैं ।
वास्तव में यह बुरा करम है इसे आदिवासी समाज से ही हटाने की बात करता है ये हम आदिवासियों  के लिए बहुत ही आपत्तिजनक है। केन्द्रीय सरना समिति आदिवासी/जनजाति संगठनों ने कहा है कि एक तरफ हम आदिवासियों का पर्व त्यौहारों को बुरा करम  कहना इसे आदिवासी समाज ही से हटाने की बात करना वहीं ईसाइयों के द्वारा हम आदिवासी त्योहारों को संशोधन कर ख्रीस्तीय  ढंग से मनाना आप मानने वाले संशोधन करने वाले होते कौन हैं ये सरासर ग़लत है।
प्रेस वार्ता में बताया गया कि इसे  लेकर दिनांक 16 सितंबर 2026 को केन्द्रीय सरना समिति एवं विभिन्न आदिवासी संगठनों ने रांची के उपायुक्त  को एक लिखित रूप से इस पर रोक लगाने की मांग की है।
आदिवासी संगठनों ने कहा की ईसाई  अपना पर्व त्यौहार को मनाए उसमे कोई आपत्ति नहीं है लेकिन अगर आदिवासियों का परब त्यौहार को आदिवासी के नाम से धर्म परिवर्तन ईसाई लोग मनाएंगे तो इसका  पुरजोर विरोध किया जाएग।
प्रेस वार्ता में मुख्य रूप से केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा, मुख्य  पहान जगलाल पहान, जनजाति सुरक्षा मंच के संदीप उरांव,  डॉ बिरसा उरांव, सोमा उरांव, अंजलि लकड़ा, शनि उरांव, अजय कुमार भोगता , झारखंड आदिवासी सरना विकास समिति के अध्यक्ष मेघा उरांव, रवि प्रकाश उरांव, एवं अन्य संगठन के विमल पहान, सतीश उरांव, विश्वकर्मा पहचान, अविनाश मुंडा, प्रदीप लकड़ा, राकेश मुंडा, संतोष मुंडा, अंजन मुंडा, विक्रम उरांव, रानी करमाली, रुक मनी देवी, मुकेश मुंडा, मुन्ना हेंब्ररोम आशीष मुंडा, गुड्डू पहान रवि करमाली, अजय मुंडा, प्रदीप मुंडा आदि उपस्थित थे।
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