UPI पर प्रस्तावित MDR वापस लेने की मांग, झारखंड चैंबर ने वित्त मंत्री को भेजा पत्र

रांची : फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI व्यापारी लेन-देन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वापस लेने की मांग की है। चैंबर अध्यक्ष तुलसी पटेल ने केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण को

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UPI MDR के प्रस्ताव का झारखंड चैंबर ने किया विरोध

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रांची : फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI व्यापारी लेन-देन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वापस लेने की मांग की है। चैंबर अध्यक्ष तुलसी पटेल ने केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र भेजकर व्यापार और उद्योग जगत की चिंताओं से अवगत कराया। चैंबर ने कहा कि देश में UPI के व्यापक प्रसार और स्वीकार्यता में व्यापारियों के लिए शून्य MDR व्यवस्था की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। छोटे दुकानदारों, व्यापारियों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों, खुदरा विक्रेताओं और सर्विस सेक्टर के प्रतिष्ठानों ने इसी वजह से डिजिटल भुगतान को तेजी से अपनाया है।

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0.4 प्रतिशत MDR पर जताई चिंता

चैंबर अध्यक्ष तुलसी पटेल ने कहा कि ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा व्यापारी-से-ग्राहक लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होने से व्यापारिक प्रतिष्ठानों की परिचालन लागत बढ़ सकती है। हालांकि किसी एक लेन-देन पर यह राशि कम दिखाई दे सकती है, लेकिन बड़ी संख्या में डिजिटल लेन-देन करने वाले व्यवसायों पर इसका संचयी प्रभाव महत्वपूर्ण हो सकता है। उन्होंने कहा कि खुदरा विक्रेता, थोक व्यापारी, वितरक और सेवा क्षेत्र के कई व्यवसाय प्रतिस्पर्धी और सीमित लाभांश पर काम करते हैं। कर्मचारियों, परिवहन, बिजली, किराया, अनुपालन और अन्य परिचालन खर्चों में लगातार वृद्धि के बीच डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की अतिरिक्त लागत व्यापारियों पर आर्थिक भार बढ़ा सकती है।

शून्य MDR व्यवस्था जारी रखने की मांग

वित्त मंत्रालय को भेजे पत्र में कहा गया कि कई वर्षों से बिना MDR के उपलब्ध UPI भुगतान व्यवस्था ने देश में नकद से डिजिटल भुगतान की ओर बदलाव को मजबूत किया है। चैंबर ने आशंका जताई कि व्यापारी स्तर पर डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की लागत बढ़ने से कुछ क्षेत्रों में भुगतान संबंधी व्यवहार प्रभावित हो सकता है। चैंबर ने कहा कि वह UPI व्यवस्था की दीर्घकालिक स्थिरता, भुगतान सुरक्षा और संबंधित सेवाओं में आवश्यक निवेश की सरकार की जरूरत को समझता है। हालांकि, उसके अनुसार इन उद्देश्यों की पूर्ति ऐसी व्यवस्था के माध्यम से होनी चाहिए, जिससे व्यापारियों के लिए डिजिटल भुगतान स्वीकार करना हतोत्साहित न हो।

RBI गवर्नर को भी भेजा पत्र

चैंबर अध्यक्ष ने केंद्रीय वित्त मंत्री से ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI व्यापारी लेन-देन पर प्रस्तावित MDR वापस लेने और व्यापारियों के लिए मौजूदा शून्य MDR व्यवस्था जारी रखने का आग्रह किया। साथ ही प्रस्तावित MDR के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों, खुदरा व्यापारियों और अधिक संख्या में डिजिटल लेन-देन करने वाले व्यवसायों पर संभावित प्रभाव का विस्तृत आकलन उद्योग संगठनों के साथ परामर्श कर करने की मांग की गई। झारखंड चैंबर ने इसी मुद्दे पर भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर को भी पत्र भेजा है। इस मुद्दे को लेकर गुरुवार को चैंबर भवन में पदाधिकारियों की बैठक भी हुई। बैठक में चैंबर अध्यक्ष तुलसी पटेल, उपाध्यक्ष विकास विजयवर्गीय और रोहित पोद्दार, महासचिव रोहित अग्रवाल, सह सचिव अमित शर्मा और सदस्य आलोक कुमार मौजूद रहे।

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