नई दिल्ली : संयुक्त राष्ट्र (UN) के एक नए विश्व मानचित्र को लेकर भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा कूटनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। UN द्वारा हाल ही में जारी किए गए इस नक्शे में भारत के अभिन्न अंग अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन को भारत और चीन के बीच अलग-अलग क्षेत्रों के रूप में दर्शाया गया है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस भ्रामक चित्रण पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के साथ कोई भी समझौता स्वीकार्य नहीं होगा।
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1 जुलाई 2026 को तैयार किया गया था नया नक्शा
यह विवादित नक्शा 1 जुलाई 2026 को तैयार किया गया था। इसमें अरुणाचल प्रदेश की दक्षिणी सीमा को चीनी रेखा और उत्तरी सीमा को भारतीय रेखा के रूप में दिखाया गया है। इतना ही नहीं, नक्शे में अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड के बीच की आंतरिक सीमा को भी हटा दिया गया है, जिससे अरुणाचल असम और चीन से लगा एक अलग भूभाग नजर आता है। इसी तरह, अक्साई चिन को भी एक अलग क्षेत्र के रूप में दिखाया गया है, जिसकी पूर्वी सीमा भारतीय और पश्चिमी सीमा चीनी रेखा के रूप में दर्शायी गई है। भारत अक्साई चिन को लद्दाख का और अरुणाचल प्रदेश को देश का अभिन्न हिस्सा मानता है। वर्ष 2011 के UN नक्शे के विपरीत, इस बार इन सीमाओं को ‘दावा रेखा’ (Claim Line) के रूप में स्पष्ट रूप से चिह्नित भी नहीं किया गया है।
जम्मू-कश्मीर, एलओसी और कालापानी का चित्रण
नक्शे में जम्मू-कश्मीर को भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा (LoC) से विभाजित दिखाया गया है। फुटनोट में उल्लेख किया गया है कि यह रेखा सहमति वाली एलओसी को दर्शाती है और अंतिम स्थिति पर अभी सहमति नहीं बनी है। दूसरी ओर, इस नक्शे में एक पहलू भारत के रुख के अनुकूल भी है। नेपाल के साथ जारी सीमा विवाद के संदर्भ में, नक्शे ने कालापानी-लिपुलेख-लिम्पियाधुरा क्षेत्र को भारत के नियंत्रण वाले हिस्से के रूप में दिखाया है, जिस पर नेपाल अपना दावा ठोकता रहा है।
विदेश मंत्रालय ने साफ की स्थिति
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दुनिया के किसी भी आधिकारिक नक्शे में जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश समेत भारत के संप्रभु क्षेत्रों को भारत सरकार के आधिकारिक मानचित्र के अनुरूप ही दिखाया जाना चाहिए। जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत ने UN में ‘करेक्ट द मैप’ (Correct the Map) प्रस्ताव के तहत समान-क्षेत्र मानचित्रण (Equal-Area Mapping) के सिद्धांत का समर्थन किया था, न कि किसी विशेष नक्शे या सीमाओं के गलत चित्रण का। यह नक्शा अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के लिए बाध्यकारी नहीं है, फिर भी भारत ने इस पर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है।






