अमृत सागर चोपड़ा, ताउम्र हर साल IIT को देंगे 1 करोड़ रुपये

अगली सदी की नींव रखने व आईआईटी आईएसएम धनबाद की स्थापना के शताब्दी वर्ष में प्रवेश करने पर सौ वर्ष, सौ करोड़ रुपए की अपील को पूर्ववर्ती छात्र हाथों हाथ ले रहे हैं। यहां से पढ़ाई कर विभिन्न पदों पर कार्यरत पूर्ववर्ती छात्र अब संस्थान

अमृत सागर चोपड़ा

अपनी भाषा में पढ़ें

अगली सदी की नींव रखने व आईआईटी आईएसएम धनबाद की स्थापना के शताब्दी वर्ष में प्रवेश करने पर सौ वर्ष, सौ करोड़ रुपए की अपील को पूर्ववर्ती छात्र हाथों हाथ ले रहे हैं। यहां से पढ़ाई कर विभिन्न पदों पर कार्यरत पूर्ववर्ती छात्र अब संस्थान को वापस देने की परंपरा को निभाते हुए संस्थान के विकास में अपना योगदान दे रहे हैं।
माइनिंग इंजीनियरिंग 1961 बैच के पासआउट छात्र अमृत सागर चोपड़ा ने संस्थान में प्रस्तावित शताब्दी भवन के कन्वेंशन हॉल के लिए शताब्दी फंड में पहले तीन करोड़ रुपए का योगदान दिया था। अब चोपड़ा ने आईआईटी धनबाद के निरंतर विकास और शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए अपने जीवनकाल तक हर साल एक करोड़ देने का संकल्प लिया है।
9 दिसंबर 1926 को स्थापित तत्कालीन इंडियन स्कूल ऑफ माइंस धनबाद यानी वर्तमान का आईआईटी धनबाद वर्ष 2026 में स्थापना के 100वें वर्ष में शताब्दी उत्सव मना रहा है। पूर्व छात्र संतोष चंद्र बीटेक पेट्रोलियम इंजीनियरिंग 1988 बैच ने शताब्दी एंडोमेंट के लिए 65.5 लाख रुपए का योगदान दिया है। उन्होंने अपने माता-पिता की याद में यह राशि दी है। इस अवसर पर संस्थान की ओर से कहा गया कि यह उस संस्थान के प्रति गहरी कृतज्ञता, जिम्मेदारी और अटूट बंधन को दर्शाता है, जिसने उनके कॅरियर के सफर को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
 कौन हैं अमृत सागर चोपड़ा
-अमृत सागर चोपड़ा आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के माइनिंग इंजीनियरिंग कोर्स के 1961 बैच के पूर्व छात्र हैं। इनोवेशन, एंटरप्रिन्योरशिप और फिलॉन्थोपी की फील्ड में वे काफी नाम कमा चुके हैं। माइन वेंटिलेशन पर बुक लिख चुके हैं। उन्हें फर्स्ट क्लास माइन मैनेजर का सर्टिफिकेट भी मिला था। एंड्र्यू युले एंड कंपनी में कुलरेी मैनेजर के बाद उन्होंने आईबीएम, टीसीएस, टाटा एलेक्सी जैसी कंपनियों के साथ इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी क्षेत्र में काम किया। 1982 में वे ओमन चले गए और कंप्यूटर एजुकेशन व हेल्थकेयर सिस्टम में एक संस्थान की स्थापना की।
उनकी कंपनी मेडिकॉम सॉफ्टवेयर का बनाया हॉस्पिटल मैनेजमेंट सिस्टम दुनिया भर के 150 से ज्यादा अस्पतालों में इस्तेमाल किया जा रहा है। इस बड़ी ऑस्ट्रेलियाई कंपनी ने भी इसे हाथोंहाथ लिया। आईआईटी धनबाद ने इन्हें स्पेशल कंटेनेरी अवॉर्ड 2026 से सम्मानित किया था। शताब्दी भवन के अंदर कन्वेंशन हॉल बनाने के लिए 3 करोड़ रुपये का योगदान भी दिया था। 1988 बैच के पूर्ववर्ती छात्र संतोष चंद्र ने दिया 65.5 लाख का योगदान
 9 दिसंबर 1926 को स्थापित आईआईटी धनबाद इस वर्ष मना रहा शताब्दी वर्ष
– सौ वर्ष, 100 करोड़ का अभियान चला रहे हैं संस्थान के पूर्ववर्ती छात्र
 किसने कितनी राशि दी
मोहिंदर सिंह गुलाटी पेट्रोलियम इंजीनियरिंग 1962 बैच ने 10 करोड़ रुपए, अमृत सागर चोपड़ा ने 3 करोड़, अविनाश आहूजा पेट्रोलियम इंजीनियरिंग 84 लाख, जगजीत सिंह यादव पेट्रोलियम इंजीनियरिंग 1965 बैच, इस्मा कोलकाता चैप्टर 50 लाख, सीएस धावेजी माइनिंग इंजीनियिरंग 50 लाख, शिवाजी दास गुप्ता अप्लाइड जियोफिजिक्स 1971 बैच 29 लाख समेत अन्य।
WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now
Facebook
X
Threads
WhatsApp
Telegram
संबंधित खबरें.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *