रांची।  झारखंड हाईकोर्ट ने शादी के करीब 35 साल बाद तलाक की मांग करने वाले जमशेदपुर के 58 वर्षीय व्यक्ति की अपील याचिका खारिज कर दी। पति ने पत्नी पर घर से निकालने, टॉयलेट में बंद करने और पानी की सप्लाई काटने समेत कई गंभीर प्रताड़ना के आरोप लगाए थे। हालांकि, अदालत ने कहा कि केवल आरोप और गवाही के आधार पर वैवाहिक संबंध खत्म नहीं किया जा सकता। क्रूरता जैसे गंभीर आरोपों को साबित करने के लिए ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य जरूरी हैं।
न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की पीठ ने जमशेदपुर फैमिली कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें तलाक की अर्जी खारिज की गई थी।
31 साल तक सामान्य रहा वैवाहिक जीवन
पति के अनुसार, उनकी शादी 20 मई 1989 को हुई थी। दंपति के तीन बेटे हैं। उनका दावा था कि शादी के करीब 31 वर्षों तक दोनों का वैवाहिक जीवन सामान्य और शांतिपूर्ण रहा। हालांकि, जून 2020 के बाद पत्नी के व्यवहार में अचानक बदलाव आया और दोनों के बीच विवाद बढ़ने लगा।
पति ने अदालत में आरोप लगाया कि पत्नी ने उसे बिरसानगर स्थित घर से बाहर निकाल दिया। इसके अलावा कई बार उसे टॉयलेट में बंद किया गया और बाथरूम की पानी की सप्लाई भी काट दी गई। पति ने यह भी आरोप लगाया कि उसे घर में गाय रखने की अनुमति नहीं दी गई।
क्रूरता और परित्याग के आधार पर मांगा था तलाक
पति ने हिंदू विवाह अधिनियम के तहत पत्नी के कथित व्यवहार को क्रूरता और परित्याग बताते हुए तलाक की मांग की थी। हालांकि, फैमिली कोर्ट ने पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण उनकी याचिका खारिज कर दी थी।
इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया
हाईकोर्ट ने कहा- आरोप साबित करने के लिए साक्ष्य जरूरी
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि वैवाहिक विवाद में लगाए गए गंभीर आरोपों को केवल बयान या गवाही के आधार पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। आरोपों की पुष्टि के लिए ठोस, विश्वसनीय और स्वतंत्र साक्ष्य आवश्यक हैं।
अदालत ने पर्याप्त प्रमाण नहीं पाए जाने पर फैमिली कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और पति की अपील खारिज कर दी।