पतरातू : झारखंड के पतरातू इलाके में शुक्रवार सुबह तेज रफ्तार कोयला लदी हाइवा की चपेट में आने से एक कर्मी की मौके पर ही मौत हो गई। हादसा पीवीयूएनएल अस्पताल के पास हुआ। मृतक ड्यूटी के लिए पैदल जा रहा था। घटना के बाद स्थानीय लोगों और ग्रामीणों ने सड़क जाम कर प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। मृतक की पहचान गया छूरा के रूप में हुई है। वह ओडिशा के टिकालागढ़ा का रहने वाला था और पतरातू स्थित आईसीएच में कार्यरत था।
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शुक्रवार सुबह वह पैदल पीवीयूएनएल की ओर ड्यूटी पर जा रहा था। इसी दौरान तेज रफ्तार से जा रही कोयला लदी हाइवा ने उसे अपनी चपेट में ले लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर इतनी भीषण थी कि गया छूरा की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई और कुछ ही देर में बड़ी संख्या में लोग वहां जुट गए।
हादसे के बाद ग्रामीणों ने किया सड़क जाम
घटना के बाद स्थानीय लोगों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने सड़क जाम कर भारी वाहनों की तेज रफ्तार और यातायात व्यवस्था पर सवाल उठाए। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना था कि इस मार्ग से हर दिन सैकड़ों कोयला लदी हाइवा गुजरती हैं। उनका आरोप था कि इस सड़क पर पहले भी कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई। ग्रामीणों ने हाइवा चालक की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। साथ ही इस मार्ग पर स्पीड लिमिट का सख्ती से पालन कराने, नियमित जांच करने और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी ट्रैफिक व्यवस्था लागू करने की मांग उठाई।
पुलिस ने समझाकर खत्म कराया जाम
हादसे की सूचना मिलते ही पतरातू थानेदार शिवलाल कुमार गुप्ता पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रहे लोगों से बातचीत की और काफी मशक्कत के बाद सड़क जाम समाप्त कराया। इसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए रामगढ़ सदर अस्पताल भेज दिया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। हाइवा और उसके चालक के संबंध में भी जानकारी जुटाई जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पीवीयूएनएल और आसपास का क्षेत्र कोयला परिवहन का प्रमुख मार्ग माना जाता है। यहां दिन-रात भारी वाहनों की आवाजाही रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि तेज रफ्तार, लापरवाही से वाहन चलाने और प्रभावी यातायात व्यवस्था की कमी के कारण इस मार्ग पर हादसे होते रहते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि हर बड़े हादसे के बाद कुछ दिनों तक कार्रवाई की बात होती है, लेकिन बाद में हालात फिर पहले जैसे हो जाते हैं। लोगों ने मांग की कि इस बार सड़क सुरक्षा और भारी वाहनों की रफ्तार को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। गया छूरा की मौत की खबर मिलने के बाद उनके परिवार और परिचितों में शोक का माहौल है। वह शुक्रवार सुबह घर से ड्यूटी के लिए निकले थे, लेकिन हादसे के कारण वापस नहीं लौट सके।




