रांची: रांची विश्वविद्यालय में पीजी की पढ़ाई को लेकर सत्र संचालन में असमानता का मामला सामने आया है। विश्वविद्यालय के 30 पीजी विभागों में जहां 2025-27 सत्र के तहत नामांकन लिया गया है, वहीं हाल में शुरू किए गए दो नए पीजी पाठ्यक्रमों का सत्र 2026-28 रखा गया है। इससे एक ही समय में विश्वविद्यालय में दो अलग-अलग पीजी सत्र संचालित होने की स्थिति बन गई है। पुराने सत्र के तहत नामांकन लेने वाले विद्यार्थियों के लिए सत्र पहले ही करीब एक साल पीछे चल रहा है। वहीं नए पाठ्यक्रम में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों की पढ़ाई वर्तमान शैक्षणिक सत्र के अनुसार आगे बढ़ेगी। ऐसे में पुराने और नए सत्र के विद्यार्थियों के बीच पढ़ाई पूरी करने के समय को लेकर अंतर की स्थिति बन रही है।
30 पीजी विभागों में 2025-27 सत्र के तहत नामांकन
रांची विश्वविद्यालय के 30 पीजी विभागों में 2025-27 सत्र के अनुसार नामांकन लिया गया है। संबंधित सत्र का एक साल बीतने के बाद भी इन विभागों में 600 से अधिक विद्यार्थियों का नामांकन हुआ है। सत्र में देरी का सामना कर रहे विद्यार्थियों को अब पीजी की पढ़ाई और परीक्षा कार्यक्रम में भी विलंब की आशंका है। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि इन विद्यार्थियों को समय पर डिग्री उपलब्ध कराई जाएगी। विश्वविद्यालय के अनुसार परीक्षा समय पर आयोजित कर परिणाम भी जारी करने का प्रयास किया जाएगा।
दो नए पीजी कोर्स का सत्र 2026-28
दूसरी ओर, विश्वविद्यालय में पीजी स्तर के दो नए पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं। इनके लिए फिलहाल नामांकन प्रक्रिया चल रही है और इन्हें 2026-28 सत्र के अनुसार संचालित करने की तैयारी है। इन पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए पूरा निर्धारित समय मिलेगा और उन्हें तय समय पर डिग्री मिलने की संभावना है। दोनों नए पाठ्यक्रम पीजी गणित विभाग के अंतर्गत संचालित किए जा रहे हैं। इस तरह एक ही विश्वविद्यालय में पुराने पीजी विभागों के विद्यार्थियों का सत्र एक साल पीछे चल रहा है, जबकि नए पाठ्यक्रम में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों का सत्र सामान्य समय के अनुसार आगे बढ़ेगा।
वोकेशनल कोर्स में भी सत्र पीछे
सत्र में देरी की समस्या केवल नियमित पीजी पाठ्यक्रमों तक सीमित नहीं है। विश्वविद्यालय के वोकेशनल पाठ्यक्रम भी निर्धारित समय से पीछे चल रहे हैं। इन पाठ्यक्रमों में भी 2025-27 सत्र के तहत नामांकन लिया गया है। वोकेशनल पाठ्यक्रमों में एमबीए, ह्यूमन राइट्स, रूरल डेवलपमेंट, एमसीए सहित अन्य कोर्स शामिल हैं। एमबीए जैसे प्रोफेशनल कोर्स में भी विद्यार्थियों का सत्र करीब एक साल पीछे हो गया है।
विश्वविद्यालय की ओर से पीजी वोकेशनल पाठ्यक्रमों में लंबे समय तक नामांकन प्रक्रिया चलाए जाने के बावजूद कई पाठ्यक्रमों की सीटें खाली रह गईं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एमसीए और एमबीए में ही सीटें पूरी तरह भर सकीं।
सत्र संचालन में अंतर को लेकर विद्यार्थियों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। अब छात्रों की नजर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से परीक्षा, परिणाम और डिग्री वितरण को निर्धारित समय पर पूरा करने की व्यवस्था पर है।




