रांची।परम पूज्य मुनि श्री सुयश सागर जी महाराज ने रांची प्रवास के दौरान धर्म सभा जी में कहा संसार में कोई दूसरा आपको सुखी, दुखी, सम्मानित या अपमानित नहीं कर सकता। हमारे खुद के विचार, कर्म और आचरण ही समाज में हमारी प्रतिष्ठा तय करते हैं।बाहरी परिस्थितियों को दोष देने के बजाय अपनी आत्मा और व्यवहार को सुधारें। मुनि श्री मंगल प्रवचनों की श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए एक अत्यंत मार्मिक और जीवनोपयोगी विषय पर प्रकाश डाला। मुनि श्री ने कहा कि इस संसार में मनुष्य को मिलने वाला सम्मान और अपमान किसी दूसरे व्यक्ति के हाथ में नहीं है, बल्कि इसका कारण वह स्वयं होता है।सभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री ने कहा, “हम अक्सर सोचते हैं कि अमुक व्यक्ति ने हमारा अपमान कर दिया या किसी दूसरे के कारण हमें समाज में प्रतिष्ठा मिली। लेकिन सच यह है कि कोई भी दूसरा व्यक्ति हमें तब तक प्रभावित नहीं कर सकता, जब तक हमारे स्वयं के कर्म कमजोर न हों। हमारा आचरण, हमारी वाणी और हमारे विचार ही समाज में हमारी छवि का निर्माण करते हैं। “मुनि श्री ने आगे विस्तार से समझाते हुए कहा कि जब व्यक्ति अहंकार, क्रोध और कड़वाहट से भर जाता है, तो वह अनजाने में ही अपने अपमान की पृष्ठभूमि तैयार कर लेता है। इसके विपरीत, जो व्यक्ति विनम्रता, शील, संतोष और परोपकार के मार्ग पर चलता है, सम्मान उसके पीछे-पीछे आता है। सम्मान मांगकर नहीं लिया जा सकता, इसे अपने उत्तम चरित्र से कमाया जाता है। प्रवचन के दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रेरणा दी कि वे बाहरी परिस्थितियों या दूसरों के व्यवहार को दोष देना बंद करें। यदि जीवन में शांति और प्रतिष्ठा चाहिए, तो अपनी आत्मा के भीतर झांकें और अपने आचरण को शुद्ध बनाएं।इस अवसर पर स्थानीय जैन समाज के पदाधिकारी, पूर्व अध्यक्षगण पूरणमल सेठी, नरेन्द्र पांड्या,छितरमल गॅगवाल कोषाध्यक्ष प्रमोद झाँझरी, संजय छाबड़ा, पंकज पांड्या, राकेश गॅगवाल, पदम गोधा,सौरभ विनायक्या, सुमीत पाटनी, संजय पाटनी, मनोज काला के अलावा गणमान्य व्यक्तियों और अन्य श्रद्धालु उपस्थित थे। यह जानकारी मीडिया प्रभारी राकेश काशलीवाल ने दी।



