नई दिल्ली: देश में दो से ज्यादा बच्चे होने पर पंचायत चुनाव लड़ने से रोकने वाले कानूनों की जरूरत पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने कहा है कि बदलती जनसंख्या और घटती जन्म दर के कारण ऐसे कानून अब अपनी प्रासंगिकता खो चुके हैं। पहले इन कानूनों के पीछे बढ़ती आबादी को रोकने का तर्क दिया जाता था, लेकिन पिछले कुछ दशकों में देश की स्थिति बदल गई है। भारत की कुल प्रजनन दर यानी टीएफआर वर्ष 2003 में 3.0 थी, जो अब घटकर 1.9 रह गई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब ऐसे कानूनों पर दोबारा विचार करने का समय आ गया है। अदालत ने इस मामले को बड़ी पीठ के पास भेज दिया है, ताकि 2003 में दिए गए अपने फैसले पर फिर से विचार किया जा सके। इस फैसले का असर उन लोगों पर भी पड़ सकता है, जिन्हें दो से अधिक बच्चे होने के कारण चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने 2003 के अपने फैसले का जिक्र किया, जिसमें चीन की सख्त जनसंख्या नियंत्रण नीति को सफल उदाहरण बताया गया था। पीठ ने कहा कि चीन ने बाद में अपनी नीति बदल दी। वर्ष 2015 में उसने एक बच्चे की नीति समाप्त कर दो बच्चों की अनुमति दी। इसके बाद 2021 में तीन बच्चे पैदा करने की अनुमति दे दी गई। चीन ने बच्चों की देखभाल, शिक्षा, मातृत्व सुरक्षा और परिवार कल्याण से जुड़ी सुविधाओं को बढ़ावा देने के कदम भी उठाए। अदालत ने कहा कि चीन का अनुभव बताता है कि जन्म दर कम करना हमेशा सफलता का संकेत नहीं होता। दुनिया के कई देश अब घटती और बुजुर्ग होती आबादी की समस्या से जूझ रहे हैं। पीठ ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण के नाम पर किसी विवाहित जोड़े के बच्चे पैदा करने के फैसले में जबरन दखल नहीं दिया जा सकता। अदालत के मुताबिक, बदलते हालात के अनुसार कानून और नीतियां बदलना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2003 में जावेद बनाम हरियाणा राज्य मामले में हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 के तहत दो से अधिक जीवित बच्चे होने पर पंचायत चुनाव लड़ने से रोकने के प्रावधान को बरकरार रखा था। अब महाराष्ट्र के मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने उस फैसले के कानूनी आधार पर दोबारा विचार करने की जरूरत बताई है। पीठ ने अपने फैसले को भारत के मुख्य न्यायाधीश के पास भेजने का निर्देश दिया है, ताकि उचित बड़ी पीठ का गठन किया जा सके। अदालत ने यह भी बताया कि बॉम्बे हाईकोर्ट के पिछले साल अगस्त के फैसले पर पहले ही रोक लगा दी गई थी। इसके साथ ही मंगला भीमराव इंगले को सरपंच के पद पर बने रहने की अनुमति दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह अंतरिम राहत सिविल अपील का अंतिम फैसला आने तक जारी रहेगी। अब बड़ी पीठ तय करेगी कि दो से अधिक बच्चे होने पर पंचायत चुनाव लड़ने से रोकने वाला कानून मौजूदा परिस्थितियों में उचित है या नहीं।



