दिल्ली : केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) में आईपीएस (IPS) अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। 23 मई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने अगले दो वर्षों में प्रतिनियुक्ति को चरणबद्ध तरीके से कम करने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद, विभिन्न बलों में वरिष्ठ पदों पर 46 और IPS अधिकारियों को डेपुटेशन पर भेजा गया है।
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अदालत ने इस पर संज्ञान लेते हुए केंद्रीय गृह सचिव से दो सप्ताह के भीतर हलफनामा दायर कर जवाब तलब किया है। न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुयान और न्यायमूर्ति ए. एस. चंदुरकर की पीठ ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि क्या सीएपीएफ (CAPF) में प्रबंधकीय और वरिष्ठ पदों को संभालने के लिए अपने सक्षम अधिकारी मौजूद नहीं हैं?
किस बल में कितने IPS अधिकारी नियुक्त?
गृह मंत्रालय द्वारा शीर्ष अदालत में दायर हलफनामे के अनुसार, 23 मई 2025 के फैसले के बाद से सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड स्तर तक के 46 IPS अधिकारियों को CAPF में लाया गया है।
बीएसएफ (BSF): 13
सीआईएसएफ (CISF): 11
सीआरपीएफ (CRPF): 09
एसएसबी (SSB): 07
आईटीबीपी (ITBP): 06
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य सवाल और निर्देश
दो सितंबर के अपने आदेश में पीठ ने गृह मंत्रालय के सचिव को कई बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है।
सर्वोच्च न्यायालय के 2025 के फैसले में दो साल के भीतर डेपुटेशन घटाने के स्पष्ट निर्देश के बावजूद इन अधिकारियों की नियुक्ति के क्या कारण थे?
इन आईपीएस अधिकारियों को डेपुटेशन पर लाने से पहले क्या प्रक्रिया अपनाई गई?
क्या संबंधित बलों की ओर से प्रतिनियुक्ति के लिए कोई आधिकारिक मांग या आवश्यकता जताई गई थी?
मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को दोपहर दो बजे तय की गई है।
CAPF कानून 2026 और अधिकारियों का विरोध
हाल ही में चार अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने ‘सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेस (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन) एक्ट, 2026’ की वैधता को चुनौती देने वाली एक याचिका पर भी केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था यह कानून CAPF के शीर्ष पदों पर IPS अधिकारियों की निरंतर प्रतिनियुक्ति की अनुमति देता है।
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लगभग 3,000 CAPF कैडर अधिकारियों (जिसमें 1,500 CRPF से हैं, साथ ही वीरता पुरस्कार विजेता और महिला अधिकारी भी शामिल हैं) ने इस अधिनियम को चुनौती दी है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह कानून कैडर अधिकारियों की पदोन्नति और नेतृत्व के अवसरों को बाधित करता है और वर्ष 2025 के ‘संजय प्रकाश बनाम यूनियन ऑफ इंडिया’ मामले में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन करता है।
2025 के ऐतिहासिक फैसले में अदालत ने स्पष्ट किया था कि CAPF के ग्रुप ए एग्जीक्यूटिव कैडर अधिकारी संगठित ग्रुप ए सेवा का हिस्सा हैं और सभी हायर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड पद संबंधित बलों के पात्र कैडर अधिकारियों से ही भरे जाने चाहिए।






