नई दिल्ली: त्योहारी सीजन से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने और बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने बड़े खरीदारों और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक सीमा घटाकर 15 दिन कर दी है। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक नया आदेश 1 सितंबर से लागू होगा और 30 नवंबर तक प्रभावी रहेगा। सरकार का उद्देश्य चीनी की जमाखोरी पर रोक लगाना और बाजार में इसकी आपूर्ति बनाए रखना है।
किन उपभोक्ताओं पर लागू होगा नया नियम?
नए नियम के तहत कोई भी औद्योगिक या संस्थागत उपभोक्ता, जो हर महीने 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का इस्तेमाल कच्चे माल, उत्पादन या उपभोग के लिए करता है, अपनी 15 दिनों की जरूरत से अधिक चीनी का भंडारण नहीं कर सकेगा। इस दायरे में मिठाई निर्माता, कन्फेक्शनरी उद्योग, शीतल पेय निर्माता, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां, हलवाई व्यवसाय और अन्य संस्थागत खरीदार शामिल हैं। इन उपभोक्ताओं की पहचान पिछले एक साल की औसत मासिक खपत के आधार पर की जाएगी। हालांकि, केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन और स्थानीय निकायों से संबंधित संस्थाओं को इस आदेश से छूट दी गई है।
GST रिटर्न से होगी खरीद और खपत की निगरानी
सरकार ने कहा है कि चीनी मिलों की ओर से बड़े उपभोक्ताओं को सीधे या डीलरों के माध्यम से बेची गई चीनी की मात्रा का सत्यापन किया जाएगा। इसके लिए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) रिटर्न और चीनी से संबंधित एचएसएन कोड का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके जरिए बड़े उपभोक्ताओं की वास्तविक खपत और चीनी खरीद की जानकारी का मिलान किया जाएगा।
एक साल में करीब 13 फीसदी बढ़ी चीनी की कीमत
सरकार ने यह फैसला ऐसे समय लिया है, जब डीलरों के लिए चीनी की स्टॉक सीमा पहले ही 30 दिनों तक सीमित की जा चुकी है। इसके बावजूद बाजार में चीनी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 18 अगस्त को चीनी का औसत खुदरा मूल्य बढ़कर 52.30 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया। एक साल पहले इसी अवधि में यह कीमत 46.34 रुपये प्रति किलोग्राम थी। इस तरह चीनी के औसत खुदरा मूल्य में सालाना आधार पर करीब 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।








