देवघर : सावन माह की शुरुआत के साथ ही झारखंड के विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम में गुरुवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। बिहार के सुल्तानगंज स्थित उत्तरवाहिनी गंगा से लेकर देवघर के बाबा बैद्यनाथ मंदिर तक करीब 105 किलोमीटर लंबे कांवर पथ पर गेरुआ वस्त्र पहने कांवड़ियों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। पूरे कांवर पथ और मंदिर परिसर में “बोल बम” और “हर-हर महादेव” के जयघोष से माहौल भक्तिमय हो गया।
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वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शुरू हुआ जलार्पण
श्रावणी मेले का औपचारिक शुभारंभ बुधवार को बिहार-झारखंड सीमा पर स्थित दुम्मा प्रवेश द्वार पर वैदिक मंत्रोच्चार और विशेष पूजा के साथ किया गया था। गुरुवार सुबह करीब चार बजे बाबा बैद्यनाथ मंदिर के पट खोले गए। इसके बाद गर्भगृह का पारंपरिक विधि-विधान से शुद्धिकरण किया गया और सरदारी पूजा संपन्न हुई। पूजा के बाद आम श्रद्धालुओं के लिए जलार्पण शुरू कर दिया गया। सावन के पहले दिन मंदिर परिसर, शिवगंगा, दुम्मा प्रवेश द्वार और पूरे कांवर पथ पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ नजर आई।
ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ का अद्भुत संगम
धार्मिक मान्यता के अनुसार, बाबा बैद्यनाथ धाम देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है। यह दुनिया का एकमात्र ऐसा तीर्थस्थल माना जाता है, जहां ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ एक ही परिसर में स्थित हैं। परंपरा के अनुसार, श्रद्धालु बिहार के सुल्तानगंज से उत्तरवाहिनी गंगा का जल कांवर में भरते हैं। इसके बाद वे करीब 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर देवघर पहुंचते हैं और बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करते हैं। जलार्पण के बाद श्रद्धालु दुमका जिले के बासुकीनाथ धाम में पूजा-अर्चना करते हैं। इसके साथ ही उनकी कांवर यात्रा पूरी मानी जाती है।
AI, ड्रोन और 11,500 जवानों की निगरानी
श्रावणी मेले में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने इस बार कई नई व्यवस्थाएं की हैं। पूरे सावन माह में स्पर्श पूजा पर रोक रहेगी। श्रद्धालु आधुनिक अरघा प्रणाली के माध्यम से ही बाबा बैद्यनाथ को जल अर्पित कर सकेंगे। इस बार वीआईपी, वीवीआईपी और आउट-ऑफ-टर्न दर्शन की सुविधा भी बंद कर दी गई है, ताकि सभी श्रद्धालुओं को समान रूप से दर्शन का अवसर मिल सके। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पहली बार एआई आधारित निगरानी, फेसियल रिकग्निशन कैमरे और ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। पूरे मेला क्षेत्र में 11,500 से अधिक पुलिसकर्मी, सीआरपीएफ और झारखंड जगुआर के जवान तैनात किए गए हैं। वहीं, श्रद्धालुओं की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए क्यूआर कोड आधारित शिकायत प्रणाली भी शुरू की गई है।




