पर्युषण महापर्व के अष्टम दिवस ‘क्षमा दिवस’ पर क्षमा और आत्मशुद्धि का संदेश

रांची। पर्युषण महापर्व के अष्टम एवं अंतिम दिवस मंगलवार को ‘क्षमा दिवस’ के रूप में श्रद्धा और आत्मचिंतन के साथ मनाया गया। श्री साधुमार्गी जैन संघ, रांची द्वारा आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में स्वाध्यायी श्रीमती पुष्पा जी ओसवाल ने क्षमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए

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रांची। पर्युषण महापर्व के अष्टम एवं अंतिम दिवस मंगलवार को ‘क्षमा दिवस’ के रूप में श्रद्धा और आत्मचिंतन के साथ मनाया गया। श्री साधुमार्गी जैन संघ, रांची द्वारा आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में स्वाध्यायी श्रीमती पुष्पा जी ओसवाल ने क्षमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि क्षमा वीरों का आभूषण है। केवल वही व्यक्ति सच्चे अर्थों में क्षमा कर सकता है, जिसमें अपने क्रोध, अहंकार और प्रतिशोध की भावना पर विजय पाने का साहस हो। क्षमा दुर्बलता नहीं, बल्कि आत्मबल और आंतरिक शक्ति का प्रतीक है।
इस अवसर पर अंतकृद्दशांग सूत्र के वाचन का समापन हुआ। स्वाध्यायी श्रीमती पुष्पा जी ओसवाल ने चंदनबाला के जीवन का प्रेरणादायक प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि चंदनबाला भगवान महावीर की परम श्रद्धालु शिष्या थीं। अनेक कठिनाइयों और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने धैर्य, संयम और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ा।
चंदनबाला के प्रसंग को बताते हुए उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने लंबे समय तक कठोर तप करने के बाद विशेष अभिग्रह लिया था कि वे एक विशिष्ट परिस्थिति में रहने वाली कन्या के हाथों से ही आहार ग्रहण करेंगे। चंदनबाला ने पूर्ण श्रद्धा और निर्मल भाव से उन्हें उड़द के बचे हुए दाने अर्पित किए। भगवान महावीर ने उनका आहार स्वीकार किया और उनका तप पूर्ण हुआ। चंदनबाला का जीवन श्रद्धा, त्याग, धैर्य, संयम और सेवा का अनुपम उदाहरण है।
स्वाध्यायी जी ने कहा कि पर्युषण केवल आठ दिनों का धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मनिरीक्षण और आत्मशुद्धि का अवसर है। व्यक्ति को अपने भीतर के क्रोध, मान, माया और लोभ को पहचानकर उनसे मुक्त होने का प्रयास करना चाहिए। क्षमा दिवस पर मन, वचन और कर्म से हुई भूलों के लिए क्षमा मांगना तथा दूसरों को हृदय से क्षमा करना ही पर्व की वास्तविक सार्थकता है।
आज संध्याकाल संवत्सरी प्रतिक्रमण का आयोजन किया जाएगा। वहीं 16 सितंबर को स्वाध्यायी जी का विदाई समारोह एवं क्षमावाणी कार्यक्रम आयोजित होगा।
इसी दिन तेरापंथ युवक परिषद की ओर से रक्तदान शिविर का भी आयोजन किया जा रहा है। समाज के लोगों से अधिक से अधिक संख्या में रक्तदान कर इस सेवा कार्य में सहभागी बनने का आह्वान किया गया।
रांची संघ में विभिन्न तपस्याएं भी गतिमान हैं। इनमें प्रमुख रूप से विशाल दसानी, पायल कोठारी, पूजा बोहरा, रेशमा बोहरा, दिशा बेंगानी, छोटेलाल जी चोरड़िया, रुबी बांठिया, ममता पींचा एवं खुशबू दसानी तप-साधना में रत हैं। उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने सभी तपस्वियों के तप की अनुमोदना की।
कार्यक्रम में केसर देवी पींचा, मूलचंद सुराणा, हुक्मीचंद चोरड़िया, विकास सुराणा, विनोद बेंगानी सहित अनेक श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।
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