नई दिल्ली : UPI से भुगतान करने वाले ग्राहकों और दुकानदारों के लिए अहम खबर है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का फैसला दिवाली के बाद तक टाल दिया है। NPCI ने मंगलवार को जारी बयान में बताया कि UPI एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी ने त्योहारों के सीजन को देखते हुए यह निर्णय लिया है। अब यह शुल्क दिवाली के तुरंत बाद लागू किया जाएगा। हालांकि, इसकी सटीक तारीख बाद में घोषित होगी। यह शुल्क सभी UPI भुगतानों पर लागू नहीं होगा। इसे केवल निर्धारित शर्तों के दायरे में आने वाले चुनिंदा कारोबारी लेनदेन पर लगाया जाएगा।
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क्या है MDR शुल्क और किसे देना होगा?
MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के बदले दुकानदार या कारोबारी को बैंक और पेमेंट प्रोसेसर को देना पड़ता है। इस शुल्क से भुगतान व्यवस्था से जुड़े विभिन्न भागीदारों की लागत पूरी करने और डिजिटल पेमेंट सिस्टम के संचालन में मदद मिलती है। सरकार और NPCI ने स्पष्ट किया है कि MDR न तो कोई टैक्स है और न ही सरकार या NPCI की ओर से वसूला जाने वाला शुल्क। पहले घोषित व्यवस्था के अनुसार, निर्धारित श्रेणियों में आने वाले 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। हालांकि, 75,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है। वहीं, 2,000 रुपये तक के लेनदेन पर कोई MDR नहीं लगेगा। ये नियम सभी दुकानों और सभी UPI भुगतानों पर लागू नहीं होंगे। शुल्क केवल उन्हीं कारोबारी लेनदेन पर लगेगा, जो निर्धारित व्यवस्था के दायरे में आते हैं।
UPI MDR on Select Merchant Transactions Shall be Implemented Post Diwali
Press Release Link: https://t.co/5KMjOP0tHd https://t.co/pD8IKfN6sR
— NPCI (@NPCI_NPCI) October 13, 2026
रेलवे, बीमा और दूसरी जरूरी सेवाओं पर कितना शुल्क?
रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन, बिजली-पानी जैसी उपयोगिता सेवाओं और शिक्षा से जुड़े चुनिंदा कारोबारी लेनदेन के लिए अलग व्यवस्था बनाई गई है। इसके तहत 2,000 रुपये से अधिक के पात्र ट्रांजैक्शन पर प्रति लेनदेन 5 रुपये का तय शुल्क लिया जाएगा। इन श्रेणियों में प्रतिशत के आधार पर शुल्क लेने के बजाय निश्चित रकम वाली व्यवस्था लागू होगी।
छोटे दुकानदारों को मिलेगी राहत
छोटे कारोबारियों के लिए राहत की बात यह है कि मौजूदा QR कोड के जरिए हर महीने 1 लाख रुपये तक का भुगतान स्वीकार करने वाले पात्र मर्चेंट शून्य-MDR व्यवस्था के तहत बने रहेंगे। इसका मतलब है कि निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले इन दुकानदारों से MDR नहीं लिया जाएगा। सरकार ने छोटे कारोबारियों को डिजिटल भुगतान अपनाने में परेशानी से बचाने के लिए यह राहत जारी रखी है।
व्यक्ति से व्यक्ति को पैसे भेजना रहेगा मुफ्त
UPI के जरिए किसी दोस्त, रिश्तेदार या दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजने पर MDR नहीं लगेगा। व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P ट्रांजैक्शन पर भेजी गई रकम कितनी भी हो, यह शुल्क लागू नहीं होगा। इसी तरह, 2,000 रुपये तक के पात्र मर्चेंट भुगतान और शून्य-MDR व्यवस्था में शामिल छोटे कारोबारियों के लेनदेन पर भी शुल्क नहीं लगेगा। यानी हर UPI ट्रांजैक्शन पर अतिरिक्त पैसे कटने की व्यवस्था नहीं है।
सरकार के मुताबिक, 96% मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर असर नहीं
वित्त मंत्रालय ने पहले जारी बयान में कहा था कि नई व्यवस्था से करीब 96 प्रतिशत P2M यानी व्यक्ति से दुकानदार को किए जाने वाले UPI लेनदेन प्रभावित नहीं होंगे। मंत्रालय के मुताबिक, शुल्क केवल निर्धारित शर्तों के तहत आने वाले चुनिंदा कारोबारी भुगतानों पर लागू होगा। इसका उद्देश्य डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में शामिल बैंकों और पेमेंट ऐप उपलब्ध कराने वाली कंपनियों को भुगतान व्यवस्था के संचालन और विस्तार में मदद देना है।
दिवाली के बाद लागू होगी नई व्यवस्था
NPCI के ताजा फैसले के बाद चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लागू करने की प्रक्रिया अब दिवाली के बाद आगे बढ़ेगी। इसकी अंतिम तारीख अलग से घोषित की जाएगी। तब तक मौजूदा शून्य-MDR नियमों के दायरे में आने वाले ग्राहकों और पात्र छोटे दुकानदारों को राहत मिलती रहेगी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद भी शुल्क केवल निर्धारित नियमों के तहत आने वाले कारोबारी लेनदेन पर ही लगेगा। इसलिए UPI इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों के लिए यह समझना जरूरी है कि MDR का मतलब हर डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगना नहीं है।




