रांची : झारखंड में इस बार दुर्गा पूजा और काली पूजा पर्यावरण अनुकूल और प्रदूषण मुक्त माहौल में मनाने की तैयारी है। झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा अधिसूचित संशोधित दिशानिर्देशों के तहत विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। बोर्ड ने पूजा आयोजन समितियों, जिला प्रशासन, नगर निकायों और आम नागरिकों के लिए दिशा-निर्देश तय किए हैं। इसका उद्देश्य पूजा के दौरान नदियों, तालाबों और पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाना है।
POP और थर्माकोल की मूर्तियों पर रोक
बोर्ड की गाइडलाइन के अनुसार पूजा पंडालों में प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP), पकी हुई मिट्टी, रेजिन फाइबर और थर्माकोल से बनी प्रतिमाओं की स्थापना पर रोक रहेगी। इसके बजाय प्राकृतिक और घुलनशील मिट्टी से तैयार इको-फ्रेंडली प्रतिमाओं को बढ़ावा देने का निर्देश दिया गया है। मूर्तियों को सजाने के लिए हल्दी, चंदन और प्राकृतिक रंगों के इस्तेमाल को कहा गया है। साथ ही मूर्तियों के निर्माण में मक्का, पालक, गेहूं और सब्जियों के पाउडर जैसे पर्यावरण अनुकूल खाद्य पदार्थों के इस्तेमाल का सुझाव दिया गया है, ताकि विसर्जन के दौरान जलीय जीवों और जलस्रोतों को नुकसान न पहुंचे।
सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूरी तरह पाबंदी
पंडालों में सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी। प्रसाद वितरण के लिए साल, महुआ, बरगद या केले के सूखे पत्तों से बने पत्तल, बायोडिग्रेडेबल पत्तल और मिट्टी के कुल्हड़ या बर्तनों का ही उपयोग किया जाएगा। पंडालों में कचरे के उचित निस्तारण के लिए तीन अलग-अलग रंग के डिब्बे यानी थ्री-बिन सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा। इसमें गीला, सूखा और गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरा अलग-अलग रखा जाएगा। पूजा समितियों को नगर निकाय या जिला प्रशासन द्वारा पंजीकृत और अधिकृत मूर्तिकारों से ही प्रतिमाएं खरीदने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा विसर्जन को लेकर पहले से प्रबंधन योजना सौंपकर अनुमति लेने को कहा गया है।
विसर्जन के लिए बनेंगे अस्थायी कृत्रिम तालाब
विसर्जन को लेकर भी गाइडलाइन में व्यवस्था तय की गई है। विसर्जन से ठीक पहले फूल, माला, वस्त्र और कागज से बनी सजावट सामग्री को अलग करना होगा। इन्हें विसर्जन स्थल पर रखे विशेष डिब्बों में डालने के निर्देश दिए गए हैं। गाइडलाइन के मुताबिक प्राकृतिक नदियों और झीलों में सीधे विसर्जन के बजाय किनारों पर मिट्टी की मेड़ बनाकर अस्थायी कृत्रिम तालाब तैयार किए जाएंगे। विसर्जन के 24 घंटे के भीतर स्थानीय निकायों को पानी से अवशेष निकालकर उनका वैज्ञानिक निस्तारण करना होगा।
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घर में पूजा करने वाले लोगों से भी अपील की गई है कि वे पूजा सामग्री को पॉलीथिन बैग में बांधकर जलस्रोतों में न फेंकें। मूर्तियों का विसर्जन घरों में या नगर निकाय द्वारा बनाए गए कृत्रिम टैंकों में करने की अपील की गई है।



