जयंती विशेष (01 जुलाई)
रांची। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम, राष्ट्रीय एकता और आधुनिक भारत के निर्माण में जनाब अब्दुल कय्यूम अंसारी का योगदान इतिहास के स्वर्णिम अध्यायों में अंकित है। 01 जुलाई को उनकी 122 वी जयंती के अवसर पर देश इस महान स्वतंत्रता सेनानी, राष्ट्रवादी चिंतक, निर्भीक पत्रकार, समाज सुधारक और करोड़ों पसमांदा, बुनकर एवं वंचित समाज की बुलंद आवाज को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है।
01 जुलाई 1905 को जन्मे जनाब अब्दुल कय्यूम अंसारी ने युवावस्था में ही महात्मा गांधी के आह्वान पर असहयोग और खिलाफत आंदोलनों में भाग लेकर अंग्रेजी हुकूमत के अत्याचारों का डटकर सामना किया। लेकिन उनका सबसे ऐतिहासिक और राष्ट्रहित में सबसे महत्वपूर्ण योगदान उस समय सामने आया, जब उन्होंने ऑल इंडिया मोमिन कॉन्फ्रेंस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में मोहम्मद अली जिन्ना और मुस्लिम लीग द्वारा प्रतिपादित ‘द्वि-राष्ट्र सिद्धांत’ का निर्भीक और सशक्त विरोध किया।
जब देश के विभाजन की साजिशें अपने चरम पर थीं, तब उन्होंने आनंद भवन में क्रिप्स मिशन के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत के करोड़ों पिछड़े मुसलमान, बुनकर और दस्तकार इस देश के अभिन्न अंग हैं और वे किसी भी कीमत पर भारत के विभाजन का समर्थन नहीं करेंगे। उनका स्पष्ट संदेश था— “राष्ट्र प्रथम”। उन्होंने अपने विचारों और संघर्ष से यह सिद्ध किया कि भारतीय मुसलमानों की असली पहचान राष्ट्रभक्ति, साझी संस्कृति और भारत की एकता के प्रति अटूट निष्ठा है।
स्वतंत्रता के बाद उन्होंने बिहार सरकार में लोक निर्माण, कुटीर उद्योग एवं पुनर्वास मंत्री के रूप में तथा बाद में राज्यसभा सदस्य के रूप में राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य के रूप में उन्होंने सामाजिक न्याय, समान अवसर और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए उल्लेखनीय कार्य किया। साथ ही, ‘अल-मोमिन’ और ‘तहज़ीब’ जैसी पत्रिकाओं का संपादन कर पत्रकारिता को जनसरोकार और सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनाया।
जनाब अब्दुल कय्यूम अंसारी का संपूर्ण जीवन राष्ट्र की अखंडता, लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक न्याय, सांप्रदायिक सौहार्द और पसमांदा समाज के उत्थान के लिए समर्पित रहा। उनका जीवन आज भी देश के युवाओं और समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
झारखंड प्रदेश मोमिन कॉन्फ्रेंस मानती है कि राष्ट्र निर्माण, स्वतंत्रता संग्राम, सामाजिक न्याय और अखंड भारत की रक्षा में उनके अद्वितीय योगदान को देखते हुए जनाब अब्दुल कय्यूम अंसारी को मरणोपरांत “भारत रत्न” से सम्मानित किया जाना चाहिए। यह सम्मान केवल एक महान राष्ट्रवादी नेता के प्रति श्रद्धांजलि नहीं होगा, बल्कि उन करोड़ों वंचित, पसमांदा, बुनकर और मेहनतकश भारतीयों के संघर्ष और योगदान का भी राष्ट्रीय सम्मान होगा, जिनकी आवाज बनकर कय्यूम साहब जीवनभर संघर्ष करते रहे।
लेखक आबिद अली
प्रदेश अध्यक्ष
झारखंड प्रदेश मोमिन कॉन्फ्रेंस



