रांची : जमशेदपुर के चर्चित बार हत्याकांड के बाद झारखंड सरकार ने कानून-व्यवस्था को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने तत्काल प्रभाव से पूर्वी सिंहभूम के वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) पीयूष पांडे और सरायकेला-खरसावां की पुलिस अधीक्षक (एसपी) निधि द्विवेदी को उनके पदों से हटाकर पुलिस मुख्यालय से संबद्ध करने का आदेश दिया है। दोनों अधिकारी पति-पत्नी हैं।
मुख्यमंत्री ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि दोनों अधिकारियों को विधि-व्यवस्था बनाए रखने में विफलता और आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में लापरवाही के कारण हटाया गया है। उन्होंने कहा कि जनता की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और अपराधियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
पूर्वी सिंहभूम के वरीय पुलिस अधीक्षक एवं सरायकेला-खरसावां के पुलिस अधीक्षक को विधि-व्यवस्था बनाए रखने में विफलता तथा आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में लापरवाही के कारण तत्काल प्रभाव से उनके पदों से हटाकर पुलिस मुख्यालय से संबद्ध करने का निर्णय मैंने लिया है।…
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) June 30, 2026
कानून-व्यवस्था की निगरानी के लिए दिए गए निर्देश
मुख्यमंत्री ने चाईबासा के आयुक्त और रांची के एडीजी को क्षेत्र में लगातार कैंप कर प्रतिदिन स्थिति की समीक्षा करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा कोल्हान डीआईजी को जमशेदपुर में रहकर कानून-व्यवस्था की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या जवाबदेही से बचने की अनुमति नहीं दी जाएगी और प्रशासन को सख्ती के साथ कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
हिमांशु सिंह हत्याकांड के बाद बढ़ा दबाव
गौरतलब है कि जमशेदपुर के बिष्टुपुर थाना क्षेत्र स्थित एक बार के बाहर करणी सेना के नेता हिमांशु सिंह की पुलिस की मौजूदगी में चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद शहर में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुआ और पुलिस पर पथराव की घटनाएं भी सामने आईं। इस हत्याकांड के बाद कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठे। इससे पहले बिष्टुपुर थाना प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मियों को भी निलंबित किया जा चुका है। पिछले वर्ष करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष विनय सिंह की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद से प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
हिमांशु सिंह हत्याकांड को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई थी। पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा सहित विपक्षी दलों ने राज्य सरकार को कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर घेरा था। लगातार सामने आ रही आपराधिक घटनाओं के बीच सरकार की इस कार्रवाई को प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।




