रांची : झारखंड हाई कोर्ट में सीएम हेमंत सोरेन की ओर से मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दाखिल याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जवाब मांगा है और केंद्र सरकार को मामले में प्रतिवादी बनाया है। मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी। हालांकि, हाई कोर्ट ने निचली अदालत में आरोप गठन की प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई है। अदालत ने कहा कि हाई कोर्ट में याचिका लंबित होने के आधार पर ईडी कोर्ट से समय नहीं मांगा जाए। यह मामला रांची के बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े और मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित है। इससे पहले विशेष PMLA अदालत ने हेमंत सोरेन के खिलाफ आरोप गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का आदेश दिया था।
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हाई कोर्ट में क्या हुआ?
हेमंत सोरेन ने ईडी कोर्ट के उस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी है, जिसके तहत मामले में आरोप गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। उनकी याचिका में PMLA एक्ट की धारा 44(1)(डी) का हवाला देते हुए कहा गया है कि जब तक मामले में जांच पूरी नहीं होती, तब तक आरोप गठन नहीं किया जाना चाहिए। इससे पहले 29 सितंबर को समयाभाव के कारण हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई टल गई थी। अदालत ने बुधवार, 30 सितंबर को दोपहर 2:15 बजे सुनवाई निर्धारित की थी।
ED ने क्या पक्ष रखा?
सुनवाई के दौरान ED की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू, वरिष्ठ अधिवक्ता अमित कुमार दास और अधिवक्ता सौरभ कुमार ने पक्ष रखा। इससे पहले एसवी राजू सुनवाई में ऑनलाइन भी जुड़े थे। हाई कोर्ट ने अब ED से जवाब मांगा है। साथ ही केंद्र सरकार को मामले में प्रतिवादी बनाया गया है। अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी।
ईडी कोर्ट में आरोप गठन का क्या मामला है?
रांची की विशेष PMLA अदालत में हेमंत सोरेन और अन्य आरोपियों के खिलाफ बड़गाईं जमीन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप गठन की प्रक्रिया चल रही है। 24 सितंबर को अदालत ने दस्तावेजों को देखने के लिए समय देते हुए आरोप गठन की सुनवाई 30 सितंबर तक टाल दी थी। विशेष PMLA अदालत ने इससे पहले आरोप गठन और आगे की कार्यवाही रोकने की मांग वाली याचिका को स्वीकार नहीं किया था। अदालत ने कहा था कि पूरक जांच या शिकायत की संभावना से मूल मामले में सुनवाई रुकती नहीं है। अब हाई कोर्ट में दायर याचिका पर ED के जवाब और 28 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई पर नजर रहेगी।





