रांची। झारखंड में हेपेटाइटिस की समय पर पहचान और प्रभावी इलाज सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम (एनवीएचसीपी) के तहत 28 जुलाई (विश्व हेपेटाइटिस दिवस) से 12 अगस्त तक ‘हेल्दी लिवर कैंपेन’ चलाया जायेगा। अभियान का उद्देश्य हाई रिस्क मरीजों की पहचान करना, हेपेटाइटिस बी और सी की जांच का दायरा बढ़ाना तथा संक्रमित मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना है। इस दौरान राज्य के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में हेपेटाइटिस बी और सी की जांच की जायेगी।
अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ का भी टीकाकरण कराया जायेगा. वहीं, ब्लड बैंक और फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) केंद्रों पर रक्त चढ़ाने से पहले हेपेटाइटिस की जांच सुनिश्चित की जायेगी. जांच में संक्रमित पाये जाने वाले मरीजों का उपचार किया जायेगा और जरूरत पड़ने पर उन्हें उच्च चिकित्सा केंद्रों में रेफर किया जायेगा. रक्तदाताओं को भी रक्तदान से पहले हेपेटाइटिस टेस्ट कराना होगा. अभियान के सफल संचालन को लेकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने रिम्स, सभी मेडिकल कॉलेजों और जिलों के सिविल सर्जनों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किये हैं.
मरीजों की पंचायत स्तर पर होगी तलाश
अभियान में पीलिया के कारण, बचाव तथा उपचार की जानकारी दी जायेगी. पंचायत स्तर पर गांवों से लेकर शहरों तक पॉजिटिव मरीजों की पहचान कर उनका नमूना लेकर रिम्स भेजा जायेगा. वहां वायरल लोड की जांच कर समय पर उपचार सुनिश्चित की जायेगा.
हाई रिस्क पर विशेष ध्यान
हाई रिस्क ग्रुप पर विशेष फोकस किया गया है. मेडिकल कॉलेज तथा जिला अस्पतालों में आ रहीं गर्भवती महिलाओं, एचआइवी के मरीज, फीमेल सेक्स वर्कर, इंजेक्टेबल ड्रग यूजर (जिन्हें नियमित रूप से रक्त चढ़ाया जाता है) व जेल में रह रहे कैदी भी इनमें शामिल होंगे.








