रांची: झारखंड में अक्टूबर के दौरान रसोई गैस की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (LDAI) के आह्वान पर गैस वितरक अपनी विभिन्न मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन कर रहे हैं। मांगों का समाधान नहीं होने पर आंदोलन को और तेज करने की तैयारी है। 6 अक्टूबर को वितरक ‘नो मनी, नो इंडेंट’ अभियान के तहत तेल कंपनियों को भुगतान नहीं करने और गैस का लोड नहीं लेने की बात कह चुके हैं। इसके बाद 26 अक्टूबर को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन प्रस्तावित है। मांगें नहीं मानी गईं तो इसके बाद अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी गई है।
झारखंड में भी एलपीजी वितरक इस आंदोलन में शामिल हैं। साहिबगंज में एलपीजी वितरकों ने आंदोलन में शामिल होने की पुष्टि करते हुए बताया है कि 6 अक्टूबर को लोड नहीं लेने और 26 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन का कार्यक्रम है।
1 सितंबर से चरणबद्ध आंदोलन
एलपीजी वितरकों का आंदोलन 1 सितंबर 2026 से शुरू हुआ। पहले चरण में वितरकों ने काली पट्टी बांधकर काम करते हुए विरोध दर्ज कराया। इसके बाद 21 सितंबर से विभिन्न जिलों में राष्ट्रपति के नाम जिलाधिकारियों को ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं।अब आंदोलन के अगले चरण में 5 अक्टूबर को देशभर में प्रेस कॉन्फ्रेंस और 6 अक्टूबर को ‘नो मनी, नो इंडेंट’ अभियान चलाने की घोषणा की गई है। इस अभियान में वितरक तेल कंपनियों को पैसा जमा नहीं करेंगे और प्लांट से सिलेंडर का लोड नहीं लेने की बात कह रहे हैं।
क्या हैं LPG वितरकों की प्रमुख मांगें?
प्रशासनिक शुल्क और होम डिलीवरी प्रभार में 75 रुपये की तत्काल अंतरिम वृद्धि।
प्रत्येक ई-केवाईसी के लिए सार्वजनिक तेल कंपनियों से 236 रुपये भुगतान की मांग।
NFR और ARB उत्पादों की बिक्री के लिए वितरकों पर दबाव नहीं डालने की मांग।
PNG को बढ़ावा देने के नाम पर LPG कनेक्शन सरेंडर कराने का दबाव खत्म करने की मांग।
नए LPG कनेक्शन से जुड़े मुद्दों का समाधान।
वितरकों के अन्य व्यावसायिक और संचालन संबंधी मामलों का समाधान।
इन मांगों का उल्लेख विभिन्न जिलों में वितरकों की ओर से सौंपे गए ज्ञापनों में किया गया है।
6 अक्टूबर को क्या होगा?
आंदोलन का सबसे अहम चरण 6 अक्टूबर को प्रस्तावित ‘नो मनी, नो इंडेंट’ अभियान है। वितरकों के मुताबिक इस दिन वे तेल कंपनियों को राशि जमा नहीं करेंगे और गैस सिलेंडरों का नया लोड नहीं लेंगे। अगर बड़ी संख्या में वितरक इस अभियान में शामिल होते हैं, तो LPG की आपूर्ति और डिलीवरी व्यवस्था पर दबाव पड़ सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कितने वितरक आंदोलन में शामिल होते हैं और तेल कंपनियां वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्था किस तरह संचालित करती हैं।
26 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर बड़ा प्रदर्शन
वितरकों ने 26 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन का कार्यक्रम तय किया है। इसके बाद भी मांगों का समाधान नहीं होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी गई है।
यानी फिलहाल 26 अक्टूबर को सीधे अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू होने की पुष्टि नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उस दिन जंतर-मंतर पर प्रदर्शन होगा और उसके बाद मांगें नहीं मानी गईं तो अनिश्चितकालीन हड़ताल का अगला कदम उठाया जा सकता है।
झारखंड में कितने LPG वितरक?
LDAI के अनुसार देशभर में 26 हजार से अधिक LPG वितरक हैं। झारखंड में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के करीब 593 LPG distributorship होने की जानकारी केंद्र सरकार के जून 2026 के एक आधिकारिक बयान में दी गई थी। उस समय सरकार ने कहा था कि राज्य में घरेलू LPG की आपूर्ति सामान्य थी और करीब 4.4 दिन का बैकलॉग था।
ऐसे में अगर राज्य में बड़ी संख्या में वितरक आंदोलन में शामिल होते हैं, तो इसका असर घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ होटल, रेस्तरां, ढाबे और LPG पर निर्भर छोटे कारोबारों पर भी पड़ सकता है।
सिलेंडर की डिलीवरी में हो सकती है देरी
आंदोलन के कारण अगर वितरक नए सिलेंडर का उठाव रोकते हैं, तो इसका सीधा असर सप्लाई चेन पर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में उपभोक्ताओं को बुकिंग के बाद सिलेंडर मिलने में ज्यादा समय लग सकता है।
हालांकि, फिलहाल झारखंड में LPG की व्यापक कमी या आपूर्ति ठप होने की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसलिए उपभोक्ताओं के बीच अनावश्यक घबराहट या जरूरत से ज्यादा सिलेंडर जमा करने से बचना जरूरी।