श्री राधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर में भागवत कथा, भजनों पर झूमे श्रद्धालु

रांची : डॉ. संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के सानिध्य में एम.आर.एस. श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट की ओर से पुंदाग स्थित श्री राधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर में श्री राधाष्टमी महोत्सव के अवसर पर सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया जा

राधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर
भजनों पर झूमे श्रद्धालु

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रांची : डॉ. संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के सानिध्य में एम.आर.एस. श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट की ओर से पुंदाग स्थित श्री राधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर में श्री राधाष्टमी महोत्सव के अवसर पर सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। कथा के तीसरे दिन भक्ति, ज्ञान और वैराग्य से जुड़े प्रसंग सुनाए गए। वृंदावन की सुप्रसिद्ध कथा वाचिका साध्वी गोपिका जी ने व्यास पीठ से ध्रुव चरित्र, जड़ भरत, भारतवर्ष की महिमा और अजामिल कथा का विस्तार से वर्णन किया।

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ध्रुव चरित्र से मिला दृढ़ संकल्प का संदेश

साध्वी गोपिका जी ने ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि बालक ध्रुव ने अपमान और प्रतिकूल परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। दृढ़ संकल्प, तपस्या और भगवान श्रीहरि के प्रति अटूट भक्ति के बल पर उन्होंने परम पद प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि ध्रुव चरित्र यह संदेश देता है कि सच्ची निष्ठा और दृढ़ संकल्प के सामने कठिन परिस्थितियां भी बाधा नहीं बन सकतीं। जड़ भरत प्रसंग के माध्यम से उन्होंने कहा कि मनुष्य को सांसारिक मोह-माया से सावधान रहते हुए परमात्मा की प्राप्ति को जीवन का लक्ष्य बनाना चाहिए। इसके बाद उन्होंने भारतवर्ष की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि यह भूमि ऋषियों, संतों और भक्तों की तपोभूमि रही है। मानव जीवन को दुर्लभ बताते हुए उन्होंने धर्म, सत्कर्म और भक्ति के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।

अजामिल प्रसंग में बताया नाम-स्मरण का महत्व

अजामिल प्रसंग के माध्यम से साध्वी गोपिका जी ने भगवान के नाम-स्मरण की महिमा बताई। उन्होंने कहा कि मनुष्य को जीवनभर सदाचार और भक्ति के मार्ग पर चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान का स्मरण और सत्संग मनुष्य के जीवन में आध्यात्मिक चेतना का संचार करते हैं। कथा के दौरान साध्वी गोपिका जी ने श्री राधा रानी और श्रीकृष्ण के सुमधुर भजनों की प्रस्तुति भी दी। भजनों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे और पूरा मंदिर परिसर राधे-राधे तथा श्रीकृष्ण के जयघोष से गूंज उठा। इस अवसर पर श्री राधा रानी श्यामा जी का मोतियों से जड़ित आभूषणों से मनोहारी श्रृंगार किया गया।

कथा से पहले साध्वी गोपिका जी ने की गौसेवा

कथा शुरू होने से पहले साध्वी गोपिका जी ने कृष्ण प्रणामी महिला समिति के सदस्यों के साथ मंदिर परिसर स्थित प्रणामी गौ सेवा धाम पहुंचकर गौसेवा की। उन्होंने गायों को गुड़-रोटी और चारा खिलाया तथा गौसेवा का महत्व बताया। कथा के समापन पर सामूहिक आरती की गई। इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण हुआ। ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि कथा के चौथे दिन प्रह्लाद चरित्र, समुद्र मंथन, वामन अवतार, श्रीराम अवतार, श्रीकृष्ण प्राकट्य और नंदोत्सव के प्रसंग सुनाए जाएंगे। कथा प्रतिदिन अपराह्न 2:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक हो रही है।

इस अवसर पर डूंगरमल अग्रवाल, विजय अग्रवाल, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, निर्मल जालान, पूरणमल सर्राफ, सुरेश अग्रवाल, मधुसूदन जाजोदिया, नंदकिशोर चौधरी, अरविंद अग्रवाल, शिव भगवान अग्रवाल, अंजनी अग्रवाल, विशाल जालान, पुजारी अरविंद पांडेय, मनीष सोनी, विष्णु सोनी, पवन अग्रवाल, सुरेश भगत, ज्ञान प्रकाश शर्मा, पवन पोद्दार, संजय सर्राफ, विद्या देवी अग्रवाल, उर्मिला पाड़िया, सुनीता अग्रवाल, संतोष देवी अग्रवाल, शीला मुरारका, शकुंतला केजरीवाल, सरिता अग्रवाल, सुमन चौधरी, आशा मुंजाल, रामादेवी डोकानिया, अमिता जालान, दीपिका मोतीका, नीलम गोयल, नंद रानी पाठक, आशा सिंह, उषा देवी, ललिता पोद्दार, किरण पोद्दार, ललिता अग्रवाल, भगवती देवी, लाल देवी, सुनीता देवी, आशा मिश्रा और किरण बरनवाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु, महिलाएं और पुरुष उपस्थित रहे।

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