रांची : भगवान शिव की आराधना को समर्पित पवित्र सावन मास और श्रावणी मेले की शुरुआत आज यानी 30 जुलाई से हो गई। सावन के पहले दिन राजधानी रांची पूरी तरह शिवमय नजर आई। शहर के प्रसिद्ध पहाड़ी मंदिर, सुरेश्वर महादेव मंदिर समेत विभिन्न शिवालयों में सुबह तड़के से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से मंदिर परिसर गूंज उठा। श्रद्धालु हाथों में गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा और अन्य पूजा सामग्री लेकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते नजर आए।
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अरघा सिस्टम और अलग मार्ग की व्यवस्था
रांची के ऐतिहासिक पहाड़ी मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस बार विशेष इंतजाम किए गए हैं। मंदिर की सीढ़ियों की मरम्मत कराई गई है। साथ ही आने-जाने के लिए नए पेवर ब्लॉक मार्ग बनाए गए हैं। भीड़ का दबाव कम करने और दर्शन व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए श्रद्धालुओं के चढ़ने और उतरने हेतु अलग-अलग सीढ़ियों की व्यवस्था की गई है। महिलाओं और पुरुषों के लिए भी अलग प्रवेश एवं निकास मार्ग निर्धारित किए गए हैं, जिसका लाभ श्रद्धालुओं को मिल रहा है।
मंदिर समिति ने जलाभिषेक के लिए इस बार अरघा सिस्टम की व्यवस्था की है। हालांकि, पहली सोमवारी से अरघा सिस्टम के माध्यम से जलार्पण शुरू होगा। इसके जरिए श्रद्धालु अधिक भीड़ के बिना आसानी से बाबा भोलेनाथ पर जल अर्पित कर सकेंगे। पहाड़ी मंदिर और सुरेश्वर महादेव मंदिर परिसर में समिति की ओर से श्रद्धालुओं को दूध, जल और बेलपत्र नि:शुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है।
सुरक्षा के लिए 60 सीसीटीवी कैमरों से निगरानी
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क है। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में 60 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनके माध्यम से हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। दर्शन के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो, इसके लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल, दंडाधिकारी और स्वयंसेवकों की तैनाती की गई है। सुबह 3:30 बजे सरकारी पूजा के बाद मंदिर के पट सुबह 4:00 बजे आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए।
श्रद्धालु सुबह 4:30 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक और दोपहर 2:00 बजे से रात 9:00 बजे तक दर्शन और जलाभिषेक कर सकेंगे। इस बार रांची नगर निगम की ओर से पहाड़ी मंदिर के आसपास किए गए अतिक्रमण को हटाने का भी लाभ श्रद्धालुओं को मिल रहा है। मंदिर क्षेत्र पहले की तुलना में अधिक खुला और व्यवस्थित दिखाई दे रहा है, जिससे श्रद्धालुओं की आवाजाही आसान हुई है। सावन महीने में सोमवार के व्रत और जलाभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है। इस वर्ष सावन की पहली सोमवारी 3 अगस्त को पड़ेगी। इसे देखते हुए प्रशासन और मंदिर समिति ने अभी से व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं।
पहली सोमवारी पर लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा, ट्रैफिक प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था की जा रही है। सावन के पहले दिन से ही रांची में आस्था, भक्ति और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। शिवभक्तों का विश्वास है कि सावन में सच्चे मन से भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना और जलाभिषेक करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यही आस्था हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं को पहाड़ी मंदिर तक खींच लाती है।
श्रद्धालुओं ने व्यवस्थाओं को बताया बेहतर
श्रद्धालु ने कहा कि सावन का पहला दिन उनके लिए बेहद पावन होता है। सुबह से ही उन्हें भगवान भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक का सौभाग्य मिला है। उन्होंने कहा कि प्रशासन और मंदिर समिति की व्यवस्थाएं पहले की तुलना में काफी बेहतर हैं। श्रद्धालु राजेश द्विवेदी ने कहा कि सावन में बाबा भोलेनाथ की पूजा का विशेष महत्व है। अलग प्रवेश-निकास मार्ग, अरघा सिस्टम और बेहतर व्यवस्था के कारण वे बिना किसी परेशानी के जलाभिषेक कर पाए। वह हर साल सावन में पहाड़ी मंदिर आते हैं। इस बार सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था काफी अच्छी है। उन्होंने बाबा भोलेनाथ से सभी के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
मंदिर के पुजारी ने मीडिया को बताया कि सावन महीने को लेकर मंदिर में सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अलग प्रवेश-निकास मार्ग, अरघा सिस्टम तथा नि:शुल्क दूध, जल और बेलपत्र की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि पहली सोमवारी से पहाड़ी मंदिर समेत रांची के विभिन्न शिवालयों में भक्तों का सैलाब देखने को मिलेगा।




