रांची : श्री श्वेताम्बर जैन मंदिर, डोरंडा में पर्युषण पर्व के सातवें दिन धार्मिक उत्साह के साथ विभिन्न अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। सुबह 7:30 बजे भक्ति भाव से स्नात्र पूजा संपन्न हुई। इसके बाद मुंबई से आए साधर्मी बंधु धैर्य पीयूष भाई और तीर्थ धर्मवीर शाह ने अपने प्रवचन में तीर्थंकरों की जीवनी पर प्रकाश डाला। प्रवचन के दौरान भगवान ऋषभदेव, पार्श्वनाथ भगवान, नेमीनाथ भगवान और भगवान महावीर स्वामी के जीवन चरित्र व उनके शासनकाल का विस्तृत वर्णन किया गया। विद्वानों ने उनके संदेशों का वाचन करते हुए बताया कि इस काल चक्र में सबसे पहले मोक्ष जाने का सौभाग्य मरुदेवी माता को प्राप्त हुआ था।
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संध्या काल में संपन्न हुई भावपूर्वक गिरनार यात्रा
शाम के समय मंदिर प्रांगण में भावपूर्वक गिरनार यात्रा का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने यहीं रहते हुए साक्षात गिरनार के नेमीनाथ दादा के दर्शन का पुण्य लाभ प्राप्त किया। प्रवचनकर्ताओं ने बताया कि वर्तमान में मौजूद जैन प्रतिमाओं में सबसे प्राचीन प्रतिमा गिरनार में स्थापित है। गिरनार तीर्थ को संवारने और उसके जीर्णोद्धार में वास्तुपाल, तेजपाल और महाराजा संप्रति का ऐतिहासिक योगदान रहा है। इसके बाद आरती और भजन संध्या का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
आज होगा संवत्सरी प्रतिक्रमण और कल्पसूत्र का वाचन
कार्यक्रम के दौरान वारसॉ (कल्पसूत्र) का चढ़ावा संपन्न कराया गया। पर्युषण पर्व के अंतिम दिन कल्पसूत्र का वांचन किया जाएगा। इस अंतिम दिवस पर समाज के लोग अपने कर्मों की निर्जरा के लिए दिन भर धार्मिक अनुष्ठान, तप और उपवास रखेंगे। शाम 3:30 बजे से सामूहिक संवत्सरी प्रतिक्रमण का आयोजन किया जाएगा। आयोजन के दौरान मुख्य रूप से सम्पतलाल रामपुरिया, सुभाष बोथरा, सुरेश बोथरा, सुशीला सेठिया, सुमन बोथरा, प्रेमलता नाहटा, उषा सेठिया, संजय नाहटा, प्रमोद बोथरा और उषा कोठारी सहित कई श्रद्धालु उपस्थित थे।




