IRCTC होटल केस में लालू, राबड़ी और तेजस्वी समेत 9 पर आरोप तय

नई दिल्ली : दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत ने IRCTC होटल मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव समेत 9 आरोपियों के खिलाफ PMLA के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया है। मामले में कुल 16 आरोपी थे,

लालू यादव

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नई दिल्ली : दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत ने IRCTC होटल मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव समेत 9 आरोपियों के खिलाफ PMLA के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया है। मामले में कुल 16 आरोपी थे, जिनमें से 7 को अदालत ने आरोपों से मुक्त कर दिया। अदालत के आदेश के अनुसार लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, प्रेम चंद गुप्ता, सरला गुप्ता, लारा प्रोजेक्ट्स, सुजाता होटल्स, विनय कोचर और विजय कोचर के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया गया है। इन आरोपियों के खिलाफ PMLA की धारा 3 और 4 के तहत मामला आगे चलेगा। अदालत ने 7 अन्य आरोपियों को आरोप तय करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं मिलने पर डिस्चार्ज कर दिया।

क्या है IRCTC होटल मामला?

यह मामला लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान रांची और पुरी के रेलवे होटलों के संचालन के लिए टेंडर से जुड़ा है। ED का आरोप है कि इन होटलों का ठेका सुजाता होटल्स प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था और इसके बदले पटना की करीब 2 एकड़ जमीन कथित तौर पर कम कीमत पर हासिल की गई। अदालत के आदेश में ED के आरोपों के अनुसार, रांची और पुरी के IRCTC होटलों के टेंडर में कथित तौर पर हेरफेर की गई थी। इसके बदले पटना की जमीन को अपराध से अर्जित आय यानी ‘proceeds of crime’ से जोड़ा गया है।

पटना की जमीन और लारा प्रोजेक्ट्स का कनेक्शन

ED के मुताबिक, पटना की जमीन पहले डिलाइट मार्केटिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड (DMCPL) के पास गई थी। इस कंपनी पर प्रेम चंद गुप्ता और उनकी पत्नी सरला गुप्ता का नियंत्रण था। बाद में कंपनी के शेयर राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को कथित तौर पर कम कीमत पर ट्रांसफर किए गए। इसके बाद कंपनी का नाम बदलकर लारा प्रोजेक्ट्स कर दिया गया। ED का आरोप है कि रेलवे होटलों का ठेका और जमीन का यह लेनदेन आपस में जुड़ा हुआ था।

लालू यादव पर क्या आरोप है?

ED का आरोप है कि लालू प्रसाद यादव ने रेल मंत्री रहते हुए अपने पद का इस्तेमाल रांची और पुरी के रेलवे होटलों का ठेका सुजाता होटल्स को दिलाने में किया। एजेंसी ने पटना की जमीन को कथित तौर पर इस लेनदेन से मिली अपराध की आय से जोड़ा है। अदालत ने आरोप तय करने के चरण में अभियोजन के मामले में पर्याप्त आधार और आरोपियों के खिलाफ मजबूत संदेह माना है। हालांकि, आरोप तय होना दोष साबित होना नहीं है। अब मामले में ट्रायल के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।

7 आरोपियों को मिली राहत

मामले में कुल 16 आरोपी थे। अदालत ने 7 आरोपियों को डिस्चार्ज कर दिया। अदालत के आदेश के मुताबिक गोरव गुप्ता, नाथ मल ककरानिया, राहुल यादव, विजय त्रिपाठी, देवकी नंदन तुलश्यान, राजीव कुमार रेलन और एम/एस अभिषेक फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ आरोप तय नहीं किए गए।

ED ने 44.75 करोड़ की संपत्तियां की थीं कुर्क

इस मामले की जांच के दौरान ED ने PMLA की धारा 5 के तहत करीब 44.75 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की थीं। अब 9 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय होने के बाद मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी। ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष अपने सबूत पेश करेगा और आरोपियों को अपना बचाव रखने का मौका मिलेगा। अंतिम फैसला अदालत में पेश किए गए सबूतों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर होगा।

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