रांची: बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान, मेसरा (BIT Mesra) के रिमोट सेंसिंग एंड जियोइन्फॉर्मेटिक्स विभाग के शोधकर्ता नितीश कुमार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। उन्हें पोलैंड के क्राको में आयोजित URSI General Assembly and Scientific Symposium (GASS) 2026 में Young Scientist Award (YSA) से सम्मानित किया गया। नितीश कुमार को यह सम्मान उनके शोध “चंद्रयान-2 डुअल-फ्रीक्वेंसी सिंथेटिक एपर्चर रडार का उपयोग करते हुए एक हिमयुक्त क्रेटर के इजेक्टा का विश्लेषण” के लिए प्रदान किया गया।
चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र पर केंद्रित शोध
यह शोध चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में स्थित हिमयुक्त क्रेटर से निकले इजेक्टा की विशेषताओं के अध्ययन पर केंद्रित है। इसके लिए डुअल-फ्रीक्वेंसी सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) अवलोकनों और उन्नत पोलरिमेट्रिक मापदंडों का इस्तेमाल किया गया। अध्ययन में क्रेटर से जुड़े इजेक्टा के विश्लेषण के लिए चंद्रयान-2 मिशन से प्राप्त अवलोकनों का उपयोग किया गया है। इसके जरिए ग्रहीय अन्वेषण में उन्नत रडार रिमोट सेंसिंग तकनीकों के इस्तेमाल की संभावनाओं का अध्ययन किया गया। यह शोध चंद्रयान-2 अनुसंधान कार्यक्रम के तहत प्रधान अन्वेषक (PI) डॉ. वी. एस. राठौर और सह-प्रधान अन्वेषक (Co-PI) डॉ. ए. पी. कृष्णा के मार्गदर्शन में किया गया।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी मिला बढ़ावा
URSI GASS 2026 में मिली यह मान्यता नितीश कुमार के शोध के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय आयाम को भी दर्शाती है। शोध में RAS Lab, CNIT, इटली के शोधकर्ता डॉ. अजीत कुमार के साथ उभरता अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी शामिल है। यह सहयोग ग्रहीय अनुप्रयोगों के लिए रडार आधारित अवलोकन और विश्लेषण के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय शोध दृष्टिकोण को बढ़ावा दे रहा है।
रिमोट सेंसिंग और अंतरिक्ष विज्ञान में महत्वपूर्ण उपलब्धि
Young Scientist Award अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक मंच पर नितीश कुमार के शोध को मिली महत्वपूर्ण मान्यता है। यह सम्मान चंद्र सतह के अध्ययन में उन्नत SAR अवलोकनों और पोलरिमेट्रिक विश्लेषण के प्रभावी उपयोग को भी रेखांकित करता है। यह उपलब्धि रिमोट सेंसिंग, रडार तकनीक और अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में विशेषज्ञतापूर्ण शोध के जरिए युवा वैज्ञानिकों के लिए ग्रहीय अन्वेषण में योगदान देने की संभावनाओं को दर्शाती है।




