नई दिल्ली : त्योहारों का मौसम शुरू होने से ठीक पहले रसोई का अति आवश्यक सामान चीनी जेब पर भारी पड़ने लगा है। चीनी के मूल्यों में हुई अचानक बेतहाशा बढ़ोतरी ने आम उपभोक्ताओं से लेकर मिठाई कारोबारियों तक की चिंता बढ़ा दी है। फुटकर बाजार में चीनी का भाव पहली बार 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। महज 15 दिनों के भीतर चीनी के दामों में 10 से 15 रुपये प्रति किलो तक का उछाल देखा गया है। कारोबारियों के अनुसार, करीब दो सप्ताह पहले चीनी 48 से 50 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रही थी, जो अब बढ़कर 61 से 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। थोक बाजार में भी चीनी का भाव पहली बार 60 रुपये प्रति किलो के आंकड़े को पार कर चुका है।
Read More : महुआ मोइत्रा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट, हेट स्पीच केस में आदेश
मांग की तुलना में आधी आपूर्ति
व्यापारियों का कहना है कि बाजार में चीनी की जितनी खपत और मांग है, उसके मुकाबले लगभग आधी ही आपूर्ति हो पा रही है। सीजन के अंतिम दौर में चीनी का उपलब्ध स्टॉक कम होना इसकी मुख्य वजह है। आने वाले दिनों में रक्षाबंधन, गणेशोत्सव, जन्माष्टमी और दिवाली जैसे बड़े त्योहार हैं, जिससे मिठाई और खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ेगी और चीनी की खपत और अधिक होगी। ऐसे में कीमतों पर दबाव और बढ़ने के आसार हैं।
उत्पादन में गिरावट और एथेनॉल का असर
बाजार में चीनी की कमी और मूल्य वृद्धि के दो मुख्य कारण सामने आए हैं :
उत्पादन में 5% की कमी : कारोबारियों के अनुसार, इस साल चीनी का कुल उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 5 फीसदी कम रहा है।
एथेनॉल उत्पादन को प्राथमिकता : चीनी मिलों द्वारा गन्ने का उपयोग चीनी बनाने के बजाय एथेनॉल उत्पादन में अधिक किया जा रहा है। नया पेराई सत्र अक्टूबर के अंत या नवंबर की शुरुआत में शुरू होता है, तब तक बाजार में उपलब्ध स्टॉक पर दबाव बना रहेगा।
मिठाई उद्योग पर पड़ेगा सीधा असर
यूपी आदर्श व्यापार मंडल के अनुसार, मिठाई बनाने में औसतन 20 प्रतिशत चीनी का इस्तेमाल होता है (जैसे एक किलो खोये में करीब 200 ग्राम चीनी)। कच्चे माल की लागत पहले ही 25 से 30 प्रतिशत बढ़ चुकी थी, ऐसे में चीनी की बढ़ती कीमतों ने मिठाई कारोबारियों के मुनाफे और लागत पर दोहरा दबाव डाल दिया है।








