रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने धनबाद के सरायढेला में 11 डिसमिल जमीन को लेकर चल रहे विवाद में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने प्रधान जिला जज, धनबाद के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें जमीन खरीदार तपेश्वर सिंह की अपील खारिज कर दी गई थी। हाईकोर्ट ने मामले को दोबारा सुनवाई के लिए अपीलीय अदालत में भेजते हुए उपलब्ध दस्तावेजों पर विचार करने और जरूरत पड़ने पर दोनों पक्षों की मौजूदगी में जमीन की फिर से मापी कराने का निर्देश दिया है।
जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने तपेश्वर सिंह की याचिका स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया। अदालत ने मामले से जुड़े दोनों पक्षों को 5 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:30 बजे प्रधान जिला जज, धनबाद की अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
2004 में रजिस्टर्ड सेल डीड से खरीदी थी जमीन
यह विवाद धनबाद के सरायढेला मौजा स्थित खाता संख्या 90 और प्लॉट संख्या 84 की 11 डिसमिल जमीन से जुड़ा है। याचिकाकर्ता तपेश्वर सिंह के अनुसार, उन्होंने वर्ष 2004 में रजिस्टर्ड सेल डीड के माध्यम से यह जमीन खरीदी थी। इसके बाद जमीन का म्यूटेशन उनके नाम पर हुआ और लगान रसीद भी जारी की गई। साथ ही, मिनरल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (MADA) ने मकान निर्माण के लिए नक्शा भी स्वीकृत किया था।
BCCL ने जमीन पर जताया अपना दावा
बाद में भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) ने दावा किया कि विवादित जमीन भू-अर्जन केस संख्या 7/65-66 के तहत अधिग्रहित भूमि का हिस्सा है। कंपनी ने याचिकाकर्ता पर अपनी जमीन पर अतिक्रमण करने का आरोप लगाया। इसके बाद एस्टेट ऑफिसर के समक्ष कार्रवाई शुरू हुई।
तपेश्वर सिंह ने जमीन की मापी और सीमांकन कराने की मांग की थी, लेकिन उनकी मांग खारिज कर दी गई। इसके बाद एस्टेट ऑफिसर ने 22 जून 2017 को जमीन से अतिक्रमण हटाने का आदेश पारित किया। इस आदेश के खिलाफ दायर अपील को प्रधान जिला जज, धनबाद ने 7 अगस्त 2023 को खारिज कर दिया था।
दस्तावेज मौजूद होने के बावजूद अपील खारिज करने पर हाईकोर्ट की टिप्पणी
हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि एस्टेट ऑफिसर के समक्ष जमीन की खरीद से संबंधित सेल डीड, म्यूटेशन आदेश, लगान रसीद, MADA का नक्शा स्वीकृति पत्र, BCCL का पत्र और मापी से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे। इसके बावजूद अपीलीय अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि याचिकाकर्ता ने अपने दावे के समर्थन में कोई दस्तावेज पेश नहीं किया।
हाईकोर्ट ने पाया कि अपीलीय अदालत की यह टिप्पणी रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों के विपरीत है। अदालत ने दस्तावेजों पर विचार किए बिना अपील खारिज किए जाने के आदेश को रद्द कर दिया और मामले की दोबारा सुनवाई का निर्देश दिया।
जमीन की दोबारा मापी से स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में जमीन की सीमा और वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए मापी के महत्व को रेखांकित किया। अदालत के समक्ष यह तथ्य आया कि प्लॉट संख्या 84 कुल 44 डिसमिल का है। इसमें BCCL भी 11 डिसमिल जमीन के अधिग्रहण का दावा कर रहा है, जबकि तपेश्वर सिंह भी उसी 11 डिसमिल हिस्से को अपनी खरीदी हुई जमीन बता रहे हैं।
ऐसे में जमीन के वास्तविक सीमांकन और दोनों पक्षों के दावों की जांच जरूरी है। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि अपीलीय अदालत उपलब्ध दस्तावेजों पर विचार कर मामले की सुनवाई करे और आवश्यकता पड़ने पर दोनों पक्षों की मौजूदगी में जमीन की दोबारा मापी कराए। अब मामले में आगे की सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को प्रधान जिला जज, धनबाद की अदालत में होगी।




