रांची : झारखंड की सांस्कृतिक पहचान और प्रकृति संरक्षण को नई दिशा देने के उद्देश्य से रांची नगर निगम पहली बार सखुआ महोत्सव-2026 का आयोजन करने जा रहा है। यह अभियान केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आम नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने के लिए जनअभियान के रूप में चलाया जाएगा। नगर निगम का लक्ष्य है कि शहर के हर वार्ड, गली और मोहल्ले में हरियाली का संदेश पहुंचे और प्रत्येक नागरिक एक पौधे के संरक्षण की जिम्मेदारी ले।
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अभियान की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए नगर आयुक्त सुशांत गौरव की अध्यक्षता में निगम पदाधिकारियों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में पौधारोपण स्थलों के चयन, वार्डवार कार्ययोजना, पौधों के संरक्षण, जनजागरूकता कार्यक्रमों और विभिन्न सामाजिक, शैक्षणिक एवं धार्मिक संस्थाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
8 अगस्त से शुरू होगा सखुआ महोत्सव
सखुआ महोत्सव-2026 का शुभारंभ 8 अगस्त 2026 को ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले चुटिया स्थित इक्कीसो महादेव मंदिर परिसर से किया जाएगा। इसके बाद पूरे अगस्त माह रांची नगर निगम क्षेत्र के सभी वार्डों में चरणबद्ध तरीके से सखुआ के पौधे लगाए जाएंगे। सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों, विद्यालयों, महाविद्यालयों, पार्कों, सार्वजनिक स्थलों, सड़क किनारे उपलब्ध भूमि, धार्मिक स्थलों और अन्य चिह्नित स्थानों पर पौधारोपण किया जाएगा।

नगर आयुक्त ने निर्देश दिया कि अभियान केवल पौधे लगाने तक सीमित न रहे। प्रत्येक लगाए गए पौधे के संरक्षण और देखभाल की जिम्मेदारी भी तय की जाए, ताकि आने वाले वर्षों में ये पौधे विकसित होकर शहर की हरित पहचान बन सकें। पहले चरण में 10 हजार सखुआ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। भविष्य में इस संख्या को और बढ़ाने की योजना पर भी जोर दिया गया।
सखुआ झारखंड की संस्कृति और प्रकृति का प्रतीक
नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने कहा कि सखुआ यानी साल केवल एक वृक्ष नहीं है, बल्कि यह झारखंड की संस्कृति, परंपरा, प्रकृति और सभ्यता से जुड़ी आस्था का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सदियों से सखुआ के पत्ते, लकड़ी और इसके अन्य प्राकृतिक गुण जनजीवन का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। जैव विविधता के संरक्षण, जलवायु संतुलन, भूजल संवर्धन और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित विरासत सुरक्षित रखने में सखुआ की महत्वपूर्ण भूमिका है।
नगर आयुक्त ने कहा कि रांची नगर निगम का उद्देश्य केवल सखुआ के पौधे लगाना नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के मन में इसके संरक्षण की भावना विकसित करना है। इससे यह अभियान आने वाले वर्षों में पूरे शहर की पहचान बन सकता है। सखुआ के पत्तों से बने दोना, पत्तल और अन्य उपयोगी सामग्री झारखंड की पारंपरिक संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। इनका उपयोग वर्षों से धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों में किया जाता रहा है।
नगर निगम का मानना है कि सखुआ के पत्तों से बने उत्पाद सिंगल यूज प्लास्टिक के प्रभावी विकल्प के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इनके व्यापक उपयोग से प्लास्टिक और थर्मोकोल जैसे प्रदूषण फैलाने वाले पदार्थों पर निर्भरता कम हो सकती है। सखुआ के पत्तों से बने दोना-पत्तल जैव अपघटनीय और पर्यावरण अनुकूल होते हैं। उपयोग के बाद ये प्राकृतिक रूप से मिट्टी में मिल जाते हैं। इनके अधिक उपयोग से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की चुनौती कम करने के साथ भूमि और जल प्रदूषण को नियंत्रित करने में भी सहायता मिल सकती है।
हर नागरिक बनेगा हरित दूत
नगर निगम अभियान में सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं, विद्यालयों, महाविद्यालयों, धार्मिक संगठनों, उद्योगों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करेगा। प्रत्येक पौधे को केवल लगाया ही नहीं जाएगा, बल्कि उसकी देखभाल और संरक्षण का संकल्प भी लिया जाएगा। नगर निगम का उद्देश्य इस अभियान को पर्यावरण संरक्षण की एक स्थायी मिसाल के रूप में विकसित करना है। नगर आयुक्त ने सभी संस्थानों, सामाजिक संगठनों, आयोजन समितियों, होटल, रेस्टोरेंट और विशेष रूप से स्ट्रीट फूड विक्रेताओं से सखुआ के पत्तों से बने दोना-पत्तल का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील की।
उन्होंने नागरिकों से सखुआ महोत्सव-2026 से जुड़ने, एक सखुआ पौधा लगाने और उसकी देखभाल का संकल्प लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सभी की भागीदारी से हरित, स्वच्छ और पर्यावरण सुरक्षित रांची के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है। बैठक में उप नगर आयुक्त रविंद्र कुमार, सहायक नगर आयुक्त, नगर अभियान प्रबंधक, गार्डन अधीक्षक सहित निगम के अन्य पदाधिकारी और कर्मी उपस्थित थे।




