रांची : सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड (सीयूजे) के अर्थशास्त्र एवं विकास अध्ययन विभाग (DEDS) और आरएंडडी सेल के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का भव्य आयोजन किया गया। मैनेजमेंट बिल्डिंग स्थित सभागार में “नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) रिसर्च इनिशिएटिव 2.0” विषय पर आयोजित इस सेमिनार में विश्वविद्यालय के शिक्षकों, शोधार्थियों, छात्रों और वित्तीय उद्योग के प्रमुख विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। पारंपरिक दीप प्रज्वलन और अतिथियों के सम्मान के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। उद्घाटन सत्र में अकादमिक अफेयर्स एवं आरएंडडी सेल के डीन प्रो. मनोज कुमार तथा अर्थशास्त्र विभाग की अध्यक्ष व स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज की डीन डॉ. संहिता सुचरिता ने स्वागत भाषण दिया।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सीयूजे के कुलपति प्रो. सारंग मेधाकर ने अकादमिक जगत और वित्तीय बाजार के बीच निरंतर संवाद की आवश्यकता रेखांकित की। उन्होंने कहा कि ऐसे सेमिनार शोधकर्ताओं को बाजार के वास्तविक आंकड़ों से जोड़ने और अकादमिक रिसर्च को व्यावहारिक बनाने में मील का पत्थर साबित होते हैं।
झारखंड में शेयर बाजार की भागीदारी पर डॉ. तीर्थंकर पटनायक का संबोधन
सेमिनार के पहले तकनीकी सत्र की अध्यक्षता आईक्यूएसी (IQAC) निदेशक प्रो. तपन कुमार बसंतिया ने की। इस सत्र के मुख्य वक्ता एनएसई (NSE) के मुख्य अर्थशास्त्री डॉ. तीर्थंकर पटनायक थे। डॉ. पटनायक ने देश और विशेषकर झारखंड में लोगों की शेयर बाजार में भागीदारी के आंकड़ों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया। डॉ. पटनायक ने कहा, “वित्तीय बाजारों में क्षेत्रीय भागीदारी के पैटर्न को समझना बेहद जरूरी है। अकादमिक शोध और वित्तीय बाजार के बीच जो खाई है, उसे ऐसे आयोजनों के माध्यम से ही भरा जा सकता है।” उन्होंने शोधार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि एक बेहतरीन शोध की शुरुआत हमेशा सही और प्रासंगिक सवाल पूछने से होती है। उन्होंने वित्तीय क्षेत्र और पूंजी बाजार में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की अपार संभावनाओं पर भी अपने विचार साझा किए।
विशेषज्ञों के साथ इंटरेक्टिव सेशन और व्याख्यान
मुख्य व्याख्यान के उपरांत एनएसई टीम के सदस्यों प्रेरणा सिंघवी, प्रसेनजीत पाल, सुशांत हेड़े और स्तुति बख्शी ने शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के साथ प्रश्नोत्तर सत्र में भाग लिया और उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया। इसके बाद प्रो. के. बी. सिंह ने “कैपिटल मार्केट की चुनौतियां और रुझान” (Challenges and Trends of Capital Market) विषय पर अपना विचारोत्तेजक व्याख्यान प्रस्तुत किया। सेमिनार के दूसरे तकनीकी सत्र की अध्यक्षता प्रो. भगवान सिंह ने की। इस सत्र में मुख्य वक्ता सीए विकास आर. सहाय ने “फाइनेंशियल लिटरेसी” (Financial Literacy) विषय पर बोलते हुए आम जीवन में वित्तीय साक्षरता, बजट प्रबंधन और सही वित्तीय फैसले लेने की समझ के महत्व को रेखांकित किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान के साथ हुआ। यह सेमिनार अकादमिक जगत और वित्तीय संस्थानों के बीच मजबूत समन्वय, वित्तीय जागरूकता और गुणवत्तापूर्ण शोध को बढ़ावा देने की दिशा में एक सफल कदम साबित हुआ।








