नई दिल्ली: भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने भारत के विकास में बदलावकारी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि इजरायल में भी प्रधानमंत्री मोदी को काफी सम्मान और लोकप्रियता हासिल है। यरुशलम में इजरायली संसद नेसेट के विशेष पूर्ण सत्र में इस वर्ष प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन का उल्लेख करते हुए अजार ने आईएएनएस से विशेष बातचीत में कहा कि इजरायल के लोग पीएम मोदी की प्रशंसा करते हैं। उनके मुताबिक, दुनिया के कई अन्य देशों की तरह इजरायल में भी भारतीय प्रधानमंत्री को बेहद सम्मान की नजर से देखा जाता है।
भारत के विकास का जिक्र
रूवेन अजार ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका को भारत में रहकर विकास के आंकड़ों और बदलावों को देखकर समझा जा सकता है। उन्होंने युवा पीढ़ी के सशक्तीकरण, अर्थव्यवस्था की विकास दर, बुनियादी ढांचे के निर्माण और सुधारों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत अब दुनिया के लिए खुल रहा है और देश में हो रहे बदलाव स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान पर निशाना
बातचीत के दौरान अजार ने ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव तथा होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति पर भी अपनी राय रखी। अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों का युद्धविराम सोमवार को खत्म होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि तेहरान वाशिंगटन के साथ समझौता करना चाहता है, लेकिन वह अपनी शर्तों के अनुरूप समझौते के लिए तैयार नहीं हैं। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका का होर्मुज स्ट्रेट पर पूरा नियंत्रण है। वहीं ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा कि ईरान और ओमान स्ट्रेट में समुद्री यातायात के नए मार्ग के नक्शे पर सहमत हुए हैं।
अजार ने कहा कि ईरान काफी हद तक कमजोर हो चुका है और होर्मुज स्ट्रेट में अपनी गतिविधियों के जरिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय तथा अमेरिका पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने इसे ईरान की ओर से नासमझी भरा कदम बताया।
पाइपलाइन विकल्पों का दिया हवाला
इजरायली राजदूत ने कहा कि कई देश होर्मुज स्ट्रेट को बाईपास करने वाली पाइपलाइन परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं। उन्होंने इराक से तुर्किए और सीरिया होते हुए भूमध्य सागर तक प्रस्तावित 60 अरब डॉलर की पाइपलाइन, सऊदी अरब की पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन और खाड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित अन्य पाइपलाइन परियोजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संयुक्त अरब अमीरात में भी एक पाइपलाइन को अपग्रेड किया जा रहा है। उनके अनुसार, इन विकल्पों के चलते ईरान की रणनीति से उसे कोई बड़ा लाभ मिलने की संभावना नहीं है।
अजार ने कहा कि इससे ईरान अपनी सैन्य और आर्थिक मोर्चे पर मिली बड़ी हार को भी छिपाने में सफल नहीं होगा।
पाकिस्तान-सऊदी-तुर्किए समझौते पर भी बोले
तेल अवीव के कुछ सुरक्षा विश्लेषकों के इस आकलन पर कि पाकिस्तान ने सऊदी अरब और तुर्किए के साथ हालिया पारस्परिक रक्षा समझौते को इजरायल और भारत के खिलाफ व्यापक मुस्लिम मोर्चे में बदलने की कोशिश की है, अजार ने कहा कि इसके प्रभावों का आकलन करना अभी जल्दबाजी होगी।उन्होंने 7 अगस्त को मक्का में हुए संयुक्त रक्षा समझौते का जिक्र करते हुए कहा कि मौजूदा स्थिति का संबंध मुख्य रूप से ईरान से बढ़ते खतरे और सऊदी अरब पर उसके हमले से है। अजार ने कहा कि इस समझौते को नाटो के बराबर मानना अभी उचित नहीं होगा और आगे की स्थिति पर नजर रखनी होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं लगता कि पाकिस्तान इस मामले में सैन्य रूप से शामिल रहा है। अजार के मुताबिक, अमेरिका ने कूटनीतिक भूमिका निभाने की कोशिश की है, लेकिन यह प्रयास बहुत सफल नहीं रहा। उन्होंने ईरान द्वारा पहले किए गए समझौते के उल्लंघन और आईआरजीसी की ओर से स्ट्रेट में जहाजों पर हमलों का भी उल्लेख किया।








