नई दिल्ली : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में सुप्रीम कोर्ट से बहुत बड़ी कानूनी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश में उनके खिलाफ लंबित निजी आपराधिक शिकायत और मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा जारी समन आदेश को पूरी तरह से रद्द कर दिया है।
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न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 153A से संबंधित अपराधों में अदालत द्वारा संज्ञान लेने से पहले राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी (Prosecution Sanction) अनिवार्य होती है। इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से ऐसी कोई मंजूरी नहीं ली गई थी।
‘मंजूरी नहीं है तो मामला यहीं खत्म’
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार का पक्ष रख रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) केएम नटराज से पूछा कि क्या राज्य सरकार ने इस मामले में मुकदमा चलाने की कानूनी मंजूरी दी है? इस पर एएसजी नटराज ने स्पष्ट इनकार किया और कहा कि ऐसी कोई मंजूरी प्रदान नहीं की गई है। आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 196 के तहत धारा 153A जैसे मामलों में राज्य सरकार की पूर्व स्वीकृति होना संवैधानिक शर्त है। शिकायतकर्ता के वकील ने दलील दी कि मामले को दोबारा मजिस्ट्रेट के पास भेजकर मंजूरी प्रक्रिया पूरी की जा सकती है, लेकिन न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता ने इसे खारिज करते हुए टिप्पणी की, “यदि कानूनी मंजूरी ही उपलब्ध नहीं है, तो मामला यहीं समाप्त हो जाता है।” इसके तुरंत बाद पीठ ने शिकायत और मजिस्ट्रेट के समन आदेशों को खारिज कर दिया।
क्या था पूरा सावरकर विवाद?
यह मामला दिसंबर 2024 में राहुल गांधी द्वारा दी गई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़ा था। शिकायतकर्ता अधिवक्ता नृपेंद्र पांडेय ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी ने सावरकर को अंग्रेजों का सेवक बताया था और उनके पेंशन लेने संबंधी दावे किए थे, जिससे समाज में सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने का प्रयास किया गया। लखनऊ की एसीजेएम कोर्ट ने इस बयान पर संज्ञान लेते हुए राहुल गांधी को आरोपी के रूप में समन जारी किया था। इलाहाबाद उच्च न्यायालय (लखनऊ पीठ) ने 4 अप्रैल 2025 को राहुल गांधी की याचिका खारिज कर उन्हें सत्र न्यायालय जाने को कहा था, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। शीर्ष अदालत में राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने पैरवी की। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने पहले इस कार्यवाही पर रोक लगाते हुए मौखिक रूप से स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान पर कड़ा रुख जताया था, लेकिन अंततः तकनीकी व कानूनी आधार (मंजूरी के अभाव) पर इस आपराधिक कार्यवाही को पूरी तरह समाप्त कर दिया।








