PM मोदी ने रामनाथ कोविंद की ऑटोबायोग्राफी का किया विमोचन

नई दिल्ली : PM मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की ऑटोबायोग्राफी ‘ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माई लाइफ, माई स्ट्रगल्स’ का विमोचन किया. इस दौरान पीएम मोदी ने राष्ट्रपति के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान मिले मार्गदर्शन और स्नेह को याद करते हुए

PM मोदी

नई दिल्ली : PM मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की ऑटोबायोग्राफी ‘ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माई लाइफ, माई स्ट्रगल्स’ का विमोचन किया. इस दौरान पीएम मोदी ने राष्ट्रपति के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान मिले मार्गदर्शन और स्नेह को याद करते हुए उनकी जमकर तारीफ की. PM ने कहा कि रामनाथ कोविंद की यह ऑटोबायोग्राफी भारतीय लोकतंत्र और समाज के लिए एक अनमोल विरासत साबित होगी. उन्होंने देश की युवा पीढ़ी से पूर्व राष्ट्रपति के जीवन के अनुभवों और संघर्षों से सीखने के लिए इस किताब को पढ़ने की अपील की.

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लोकतंत्र और समाज के लिए अनमोल धरोहर

किताब के विमोचन के अवसर पर PM मोदी ने कहा कि वे रामनाथ कोविंद को लंबे समय से बहुत करीब से जानते हैं. राष्ट्रपति के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान उनका मार्गदर्शन, स्नेह और अपनापन हमेशा उनके लिए बेहद कीमती रहा है. पीएम मोदी ने कहा कि यह किताब भारत के लोकतंत्र की जीत को दर्शाती है. भले ही कोविंद जी का जीवन और संघर्ष व्यक्तिगत थे, लेकिन उन संघर्षों के परिणामस्वरूप मिली सफलता भारतीय गणराज्य और भारत के लोकतंत्र की जीत है.

पीएम मोदी ने याद की कोविंद जी की सादगी

कार्यक्रम के दौरान PM ने पूर्व राष्ट्रपति की सादगी से जुड़े संस्मरण भी साझा किए. उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति भवन में बैठकों के बाद कोविंद जी अक्सर प्रोटोकॉल से परे जाकर PM को विदा करने कार के दरवाजे तक आते थे. इसके अलावा, राष्ट्रपति बनने के बाद जब वे अपने पैतृक गांव परौंख गए, तो उन्होंने अपने शिक्षकों के पैर छुए और गांव की मिट्टी को नमन किया. उनके इस व्यवहार ने पूरी दुनिया के सामने भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों की एक गर्व महसूस कराने वाली तस्वीर पेश की.

बचपन की दुखद घटना का जिक्र कर हुए भावुक

PM मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति के बचपन से जुड़े एक भावुक प्रसंग का भी उल्लेख किया. उन्होंने बताया कि गर्मियों के दिनों में जब कोविंद जी के घर में आग लग गई थी, तब उनकी मां ने सामान बचाने की कोशिश की. इस कोशिश में वे आग की चपेट में आ गईं और उनकी जान चली गई. इतनी कम उम्र में अपनी मां को खोने का दुख बेहद पीड़ादायक रहा होगा. वहीं पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने संबोधन में कहा कि अपनी आत्मकथा के लॉन्च के मौके पर उपस्थित लोगों को संबोधित करना उनके लिए एक बेहद भावुक क्षण है. उन्होंने अपने जीवन के सभी अनुभवों और संघर्षों को इस किताब में पाठकों के लिए विस्तार से साझा किया है.

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