रांची : रांची में सीएम आवास का घेराव करने के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों और नेताओं को पुलिस हिरासत में लिए जाने का मामला अब झारखंड विधानसभा में गहरा गया है। विपक्ष ने पुलिस-प्रशासन की इस कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के संसदीय विशेषाधिकारों का हनन करार दिया है। बीजेपी ने विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो से संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्रवाई की मांग की है।
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बीजेपी का आरोप है कि सोमवार को सीएम आवास घेराव के दौरान पार्टी के विधायकों को हिरासत में लेकर लंबे समय तक खेलगांव स्थित कैंप में रोके रखा गया। पार्टी के अनुसार, राज्य गठन के बाद यह पहली बार हुआ जब विपक्षी विधायकों की गैरमौजूदगी में सदन के भीतर अनुपूरक बजट पर चर्चा हुई और उन्हें अपने सवाल व कटौती प्रस्ताव रखने का मौका नहीं मिला।
सोमवार को जब जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं व पेपर लीक के विरोध में आंदोलन कर रहे छात्र संगठनों के समर्थन में बीजेपी ने सीएम आवास का रुख किया था। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल, विधायक राज सिन्हा, सीपी सिंह और आलोक चौरसिया सहित कई नेता सीएम हेमंत सोरेन से मिलकर सीबीआई जांच की मांग करने जा रहे थे, जिन्हें पुलिस ने मुख्य द्वार पर रोककर हिरासत में ले लिया।
इस कार्रवाई के खिलाफ धनबाद से बीजेपी विधायक राज सिन्हा ने विधानसभा अध्यक्ष को औपचारिक पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधियों को सीएम से मिलने से रोकना और घंटों रोके रखना असंवैधानिक है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का अनुरोध किया है।
वहीं, सत्ता पक्ष ने बीजेपी के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। सरकार का कहना है कि विपक्ष छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहा है। सत्ता पक्ष के अनुसार, सीएम आवास की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस-प्रशासन ने नियमानुसार आवश्यक कदम उठाए। फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि विधानसभा अध्यक्ष इस शिकायत पर क्या रुख अपनाते हैं।




