नई दिल्ली/रांची : भारतीय जनता पार्टी (BJP) के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने नई दिल्ली स्थित संसद भवन परिसर में मीडिया से बात करते हुए राज्य के छात्र आंदोलन पर कांग्रेस पार्टी की चुप्पी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कांग्रेस को ‘अन्यायी, झूठी और धोखेबाज पार्टी’ करार देते हुए कहा कि झारखंड में कांग्रेस केवल मलाई खाने के लिए सत्ता से चिपकी हुई है और उसे युवाओं या छात्रहित से कोई लेना-देना नहीं है। आदित्य साहू ने कहा कि झारखंड में पिछले छह वर्षों से अधिक समय से कांग्रेस के समर्थन से झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के नेतृत्व वाली सरकार चल रही है, जो लगातार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। वर्ष 2019 के बाद से आयोजित लगभग सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में भयंकर धांधली और अनियमितताएं सामने आई हैं।
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‘CBI जांच का समर्थन करे कांग्रेस या सरकार से वापस ले समर्थन’
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पिछले 13 दिनों से राजधानी रांची में हजारों छात्र अपने अधिकारों और न्याय की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों की स्पष्ट मांग है कि CM सह शिक्षा मंत्री हेमंत सोरेन तत्काल अपने पद से इस्तीफा दें और JPSC-JSSC समेत सभी भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्ष सीबीआई (CBI) जांच कराई जाए। उन्होंने कांग्रेस पार्टी को घेरते हुए कहा कि अगर कांग्रेस वास्तव में खुद को युवाओं और छात्रों की हितैषी मानती है, तो उसे छात्रों की इन जायज मांगों का खुलकर समर्थन करना चाहिए। यदि कांग्रेस ऐसा नहीं कर सकती, तो उसे घड़ियाली आंसू बहाना बंद करके हेमंत सोरेन सरकार से अपना समर्थन वापस लेने की घोषणा करनी चाहिए।
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के मौन पर उठाए सवाल
श्री साहू ने तंज कसते हुए कहा, “दिल्ली और अन्य राज्यों में छात्रों के मुद्दों पर राजनीति करने वाले कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जुबान झारखंड के छात्रों के मामले पर पूरी तरह बंद है। राहुल गांधी को प्रयागराज जाने से पहले रांची आना चाहिए, जहां के छात्र न्याय की आस में उन्हें ढूंढ रहे हैं। इस दोहरे रवैये से कांग्रेस का असली चेहरा बेनकाब हो गया है।”
आंदोलनरत छात्रों को प्रताड़ित करने का आरोप
आदित्य साहू ने राज्य सरकार पर आंदोलनकारी छात्रों को प्रताड़ित करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बारिश और धूप के बावजूद डटे हुए छात्रों को टेंट लगाने की अनुमति नहीं दी जा रही है और रात में धरना स्थल की बिजली काट दी जाती है। कई अभ्यर्थी अनशन पर बैठे हैं, लेकिन सरकार उनकी सुध लेने के बजाय दमनकारी नीति अपना रही है। उन्होंने साफ किया कि सरकार चाहे जितनी कोशिश कर ले, उसे सभी भर्ती घोटालों की सीबीआई जांच करानी ही पड़ेगी।




