रांची : झारखंड में आंगनबाड़ी सेविका और सहायिकाएं अपनी 6 सूत्री मांगों को लेकर एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने जा रही हैं। ‘झारखंड प्रदेश आंगनवाड़ी वर्कर्स यूनियन’ (रांची) के बैनर तले 11 अगस्त को राज्यभर की हजारों सेविकाएं और सहायिकाएं अपनी मांगों के समर्थन में विधानसभा का घेराव करेंगी। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार के साथ वार्ता सकारात्मक नहीं रही, तो 12 अगस्त से राज्य की लगभग 80 हजार आंगनबाड़ी सेविकाएं और सहायिकाएं अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चली जाएंगी।
इन 6 प्रमुख मांगों को लेकर फूटा आक्रोश
यूनियन के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष बालमुकुंद सिंह ने बताया कि सरकार की वादाखिलाफी के कारण आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश है। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं :
पेंशन योजना : सेवानिवृत्त (रिटायर) सेविका-सहायिकाओं के लिए पेंशन व्यवस्था लागू करना।
ग्रेच्युटी का भुगतान : सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन करते हुए ग्रेच्युटी लागू करना।
बकाया मानदेय व पोषाहार : पिछले 8-9 महीनों से अटका हुआ मानदेय और पोषाहार की राशि का तत्काल भुगतान।
प्रमोशन प्रक्रिया : सेविका से महिला पर्यवेक्षिका (सुपरवाइजर) के पद पर पदोन्नति की प्रक्रिया को बिना टाल-मटोल पूरा करना।
आर्थिक लाभ : सेवानिवृत्त कर्मियों को तत्काल आर्थिक लाभ देना।
वार्ता व समझौते का क्रियान्वयन : पिछले 2 वर्षों से लंबित वार्ताओं और आश्वासनों को अमलीजामा पहनाना।
‘अभी नहीं तो कभी नहीं’: सभी संगठनों से एकजुट होने की अपील
यूनियन के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष बालमुकुंद सिंह ने राज्य की सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से एकजुट होने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा, “यह लड़ाई किसी एक संगठन या राजनीति से प्रेरित नहीं है, बल्कि यह आपके बच्चों, आपके भविष्य और आपकी आजीविका से जुड़ा मामला है। 8-9 महीने से मानदेय न मिलना और रिटायरमेंट के बाद आर्थिक तंगी से गुजरना बेहद दुखद है।” उन्होंने सभी जिलों की सेविका-सहायिकाओं से अपील की है कि वे 11 अगस्त को अधिक से अधिक संख्या में रांची पहुंचकर विधानसभा घेराव को सफल बनाएं और अपनी सांगठनिक ताकत का परिचय दें।
वार्ता विफल होने पर 12 अगस्त से ठप रहेंगी सेवाएं
यूनियन ने मुख्यमंत्री सह विभागीय मंत्री (महिला एवं बाल विकास मंत्री) से इस विषय पर तत्काल उच्चस्तरीय वार्ता करने की मांग की है। प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि 11 अगस्त तक वार्ता के जरिए मांगों का न्यायसंगत समाधान नहीं निकाला गया, तो 12 अगस्त से पूरे झारखंड की 80 हजार सेविका-सहायिकाएं हड़ताल पर चली जाएंगी, जिससे राज्यभर के आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन पूरी तरह से ठप हो जाएगा।




