रांची : झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं से जुड़ा विवाद तथा आंदोलनरत छात्रों का मुद्दा सदन के भीतर और बाहर छाया रहा। विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राज्य की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि राज्य सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर पूरी तरह गंभीर और सजग है। उन्होंने बताया कि सीएम हेमंत सोरेन ने छात्रों के आंदोलन शुरू होने से पहले ही JPSC से जुड़े मामलों का संज्ञान लेना शुरू कर दिया था और सरकार पल-पल की स्थिति पर अपनी नजर बनाए हुए है।
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‘छात्र जहां चाहेंगे, वहीं पहुंचकर बातचीत करेगा सरकार का प्रतिनिधिमंडल’
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार आंदोलनरत अभ्यर्थियों से संवाद स्थापित करने के लिए पूरी तरह तैयार है। इसके लिए एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल (डेलीगेशन) गठित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता बातचीत के जरिए इस समस्या का सकारात्मक समाधान निकालना है। छात्र जहां भी बैठकर चर्चा करना चाहेंगे, सरकार का प्रतिनिधिमंडल वहीं पहुंचकर उनकी बात सुनेगा और समाधान की दिशा में ठोस पहल करेगा।
CID जांच से असंतोष और CBI की मांग पर BJP पर साधा निशाना
जब उनसे पुछा गया कि आंदोलनरत छात्र राज्य पुलिस की CID जांच से संतुष्ट नहीं हैं और लगातार CBI जांच की मांग कर रहे हैं, तो मंत्री ने इसके लिए सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राजनीति को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि CBI और ED जैसी केंद्रीय एजेंसियों के राजनीतिक दुरुपयोग के कारण ही आम जनता का जांच एजेंसियों की विश्वसनीयता से भरोसा कम हुआ है। हालांकि, उन्होंने आश्वस्त किया कि झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार निष्पक्ष जांच के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और छात्रों को हर हाल में न्याय मिलेगा।
25 जुलाई से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में डटे हैं अभ्यर्थी
मालूम हो कि झारखंड की राजधानी रांची स्थित जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम के समीप 25 जुलाई से हजारों अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में अनिश्चितकालीन धरना और सत्याग्रह कर रहे हैं।
आंदोलनकारी छात्रों की मुख्य मांगें :
परीक्षा रद्द करने की मांग : 14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए।
CBI जांच : पूरे भर्ती विवाद और कथित पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच CBI से कराई जाए।
पारदर्शिता और सुधार : भर्ती प्रक्रियाओं को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
हालांकि राज्य सरकार ने इस मामले की जाँच CID को सौंपी है और कुछ गिरफ्तारियाँ भी हुई हैं, लेकिन अभ्यर्थी निष्पक्ष जांच और ठोस फैसलों की मांग पर लगातार अड़े हुए हैं।




