रांची : झारखंड विधानसभा के आगामी मानसून सत्र की तैयारियों को लेकर अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो ने सोमवार को एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। स्पीकर कक्ष में आयोजित इस बैठक में संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, गृह सचिव वंदना दादेल और वित्त सचिव प्रशांत कुमार समेत कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक के दौरान 6 से 12 अगस्त तक आयोजित होने वाले पांच दिवसीय मानसून सत्र के लिए प्रशासनिक और सुरक्षा तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की गई।
Read More : JBVNL की नई पहल: रांची और खूंटी में बिजली शिकायतों का घर बैठे समाधान
प्रश्नों का समय पर उत्तर देने के निर्देश
स्पीकर रबींद्रनाथ महतो ने अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि विधायक अक्सर समय पर प्रश्नों के उत्तर या विधेयकों की प्रतियां न मिलने की शिकायत करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी विभागीय उत्तर समय सीमा के भीतर सदन को उपलब्ध कराए जाने चाहिए। सत्र के दौरान विधानसभा परिसर के बाहर संभावित धरना-प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुलिस अधिकारियों को भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही को शांतिपूर्ण ढंग से संचालित करने के लिए सभी सदस्यों से सहयोग की अपील की।
1390 आश्वासनों और शून्य काल के प्रश्नों का जवाब लंबित
बैठक में लंबे समय से लंबित प्रश्नों और आश्वासनों का मुद्दा प्रमुखता से उठा। विधानसभा में सरकार द्वारा दिए गए 1390 आश्वासनों पर अब तक संबंधित विभागों की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है। स्थिति यह है कि मंत्रियों द्वारा सदन में चर्चा के दौरान दिए गए आश्वासनों पर भी कार्रवाई रिपोर्ट नहीं आई है। इसके अलावा शून्य काल के दौरान विधायकों द्वारा लाई गई 440 सूचनाओं में से 321 का उत्तर अब तक लंबित है। इनमें शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विभाग शामिल हैं, जिससे सदस्यों में नाराजगी बनी रहती है।
JPSC के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में विपक्ष
पांच दिवसीय इस मानसून सत्र में विपक्ष जेपीएससी (JPSC) समेत कई अन्य ज्वलंत मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है। विपक्ष की तैयारियों पर संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि सरकार हमेशा छात्रों के हित में खड़ी रही है। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष सदन में नियम के तहत मुद्दा उठाता है तो सरकार उसका उचित उत्तर देगी। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि सदन में हंगामा होता है, तो छात्रों के विषयों पर सार्थक चर्चा संभव नहीं हो पाएगी।




