खूंटी : कर्रा प्रखंड की छाता पंचायत स्थित राजकीय उत्क्रमित उच्च विद्यालय, छाता में मध्याह्न भोजन व्यवस्था को लेकर खूंटी के विधायक रामसूर्या मुंडा ने गहरी नाराजगी जताई है। विद्यालय के औचक निरीक्षण के दौरान उन्होंने मिड-डे मील वितरण में कथित अनियमितताओं को लेकर बच्चों के स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल उठाए।
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विधायक ने मामले की तत्काल और निष्पक्ष जांच कराने के साथ दोषी पाए जाने वाले शिक्षकों, अधिकारियों और संबंधित कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य और अधिकारों से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बारिश में खुले स्थान पर बांटा जा रहा था भोजन
निरीक्षण के दौरान विधायक ने देखा कि मिड-डे मील खुले स्थान पर वितरित किया जा रहा था। उस समय बारिश हो रही थी और वर्षा का पानी भोजन में गिर रहा था। इसके बावजूद छात्र-छात्राएं वही भोजन ले रहे थे। विधायक रामसूर्या मुंडा ने इसे बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति गंभीर लापरवाही बताया। उन्होंने कहा कि मध्याह्न भोजन योजना का उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक और सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराना है। ऐसे में भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। निरीक्षण के दौरान विधायक ने विद्यालय की व्यवस्था को लेकर प्रभारी को फटकार भी लगाई। उन्होंने कहा कि बच्चों को सुरक्षित वातावरण में भोजन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी से किसी को पीछे नहीं हटना चाहिए।
बच्चों से पहले शिक्षक के भोजन करने का आरोप
विधायक ने आरोप लगाया कि निरीक्षण के दौरान एक शिक्षक बच्चों को भोजन मिलने से पहले खुद मिड-डे मील ग्रहण कर रहे थे। उस समय बच्चे बारिश में भीगते हुए भोजन मिलने का इंतजार कर रहे थे। इस स्थिति पर नाराजगी जताते हुए विधायक ने विद्यालय प्रभारी को फटकार लगाई और इसे दुर्भाग्यपूर्ण व अस्वीकार्य बताया। उन्होंने कहा कि बच्चों को प्राथमिकता देते हुए भोजन वितरण की उचित व्यवस्था होनी चाहिए।
विद्यार्थियों ने मेन्यू और अंडा नहीं मिलने की शिकायत की
विधायक ने निरीक्षण के दौरान छात्र-छात्राओं से भी बातचीत की। कई विद्यार्थियों ने शिकायत की कि उन्हें कई बार निर्धारित मेन्यू के अनुसार भोजन नहीं मिलता है। बच्चों ने यह भी बताया कि अंडा नियमित रूप से उपलब्ध नहीं कराया जाता। रामसूर्या मुंडा ने कहा कि सरकारी योजनाओं के संचालन में इस तरह की लापरवाही का सबसे ज्यादा असर गरीब और जरूरतमंद बच्चों पर पड़ता है। इसलिए योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है।
विधायक ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की तत्काल निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने दोषी पाए जाने वाले शिक्षकों और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के साथ जिम्मेदार कर्मियों को हटाने की भी मांग की। उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों, विद्यालय प्रभारियों और कर्मचारियों से ईमानदारी तथा जवाबदेही के साथ काम करने की अपील की। विधायक ने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य और अधिकारों के साथ किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।




