बिहारी बाबू शत्रुघ्न सिन्हा,आसनसोल आपको खोज रहा! भाजपा नेताओं ने दर्ज करा दी मिसिंग डायरी

आसनसोल। कहां है बिहारी बाबू शत्रुघ्न सिन्हा,आसनसोल की जनता आपको खोज रही है। भाजपा समर्थकों ने आसनसोल के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा की गुमशुदगी को लेकर मिसिंग डायरी दर्ज कराई है। कहा है कि यह प्रतीकात्मक विरोध है। इसके कई महीने पहले शत्रुघ्न सिन्हा की गुमशुदगी

आसनसोल। कहां है बिहारी बाबू शत्रुघ्न सिन्हा,आसनसोल की जनता आपको खोज रही है। भाजपा समर्थकों ने आसनसोल के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा की गुमशुदगी को लेकर मिसिंग डायरी दर्ज कराई है। कहा है कि यह प्रतीकात्मक विरोध है। इसके कई महीने पहले शत्रुघ्न सिन्हा की गुमशुदगी के पोस्टर भी साटे गए थे। इधर, फिर एक बार आसनसोल के तृणमूल सांसद शत्रुघ्न सिन्हा को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। भाजपा कार्यकर्ताओं ने संसदीय क्षेत्र में नहीं आने का आरोप लगाते हुए उखड़ा पुलिस फाड़ी में उनके नाम पर प्रतीकात्मक मिसिंग डायरी दर्ज कराई है। भाजपा कार्यकर्ता उखड़ा पुलिस फाड़ी  पहुंचे और सांकेतिक विरोध दर्ज कराया।

प्रतीकात्मक गुमशुदगी की डायरी दर्ज कराई गई है

आरोप लगाया कि लोकसभा चुनाव के बाद से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा क्षेत्र में दिखाई नहीं देते है। आम लोगों से उनका संपर्क नहीं हो रहा है। भाजपा नेताओं का कहना है कि क्षेत्र के लोग अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर सांसद  से संपर्क नहीं कर पा रहे है। उनका दावा है कि प्रशासन का ध्यान इस मुद्दे पर आकर्षित करने के उद्देश्य से प्रतीकात्मक गुमशुदगी की डायरी दर्ज कराई गई है। उनका यह भी कहना है कि क्षेत्र के जन प्रतिनिधि को अपने क्षेत्र के लोगों के बीच नियमित रूप से उपस्थित रहना और उनकी समस्याओं को सुनना उनकी जिम्मेवारी है। आरोप लगाया गया है कि सांसद की अनुपस्थिति के कारण जनता को परेशानी हो रही है। हालांकि तृणमूल कांग्रेस की ओर से इस मुद्दे को लेकर कोई प्रतिक्रिया अभी नहीं आई है।   

शत्रुघ्न सिन्हा आसनसोल लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं

दरअसल, शत्रुघ्न सिन्हा आसनसोल लोकसभा क्षेत्र से सांसद है। यह इलाका पूरी तरह से झारखंड से सटा हुआ है और यहां  बिहार के लोगों की अच्छी संख्या है। इस वजह से हर पार्टी चाहती है कि यहां से किसी बिहारी को टिकट दिया जाए। आपको याद होगा कि भाजपा ने भोजपुरी पावर स्टार पवन सिंह को आसनसोल से ही उम्मीदवार बनाया था। लेकिन बाद में उन्होंने आसनसोल से चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया और वह बिहार के काराकाट से निर्दलीय चुनाव लड़े, लेकिन उन्हें जीत हासिल नहीं हुई। फिलहाल वह विधान पार्षद हैं।

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