NEET UG 2026 विवाद का पूरा घटनाक्रम, पेपर लीक से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक की पूरी टाइमलाइन

नई दिल्ली : NEET UG 2026 परीक्षा को लेकर शुरू हुआ विवाद कुछ ही महीनों में देश के सबसे चर्चित राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों में शामिल हो गया। पेपर लीक के आरोपों से शुरू हुआ यह मामला परीक्षा रद्द होने, दोबारा परीक्षा आयोजित किए जाने,

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नई दिल्ली : NEET UG 2026 परीक्षा को लेकर शुरू हुआ विवाद कुछ ही महीनों में देश के सबसे चर्चित राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों में शामिल हो गया। पेपर लीक के आरोपों से शुरू हुआ यह मामला परीक्षा रद्द होने, दोबारा परीक्षा आयोजित किए जाने, छात्रों के आंदोलन, विपक्ष के विरोध, संसद में हंगामे और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक पहुंच गया। इसी दौरान केंद्र सरकार ने पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून लाने की प्रक्रिया भी शुरू की।

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24 जुलाई को केंद्रीय कैबिनेट ने पेपर लीक के खिलाफ कड़े प्रावधानों वाले ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दी। इसके अगले दिन 25 जुलाई 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। आइए जानते हैं मई से जुलाई तक पूरे घटनाक्रम की क्रमवार टाइमलाइन।

3 मई से 21 जून तक : परीक्षा, पेपर लीक के आरोप और दोबारा एग्जाम

3 मई 2026 को देशभर में NEET UG परीक्षा आयोजित की गई, जिसमें करीब 22 से 24 लाख अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया। परीक्षा के कुछ दिनों बाद पेपर लीक के आरोप सामने आने लगे। आरोप था कि परीक्षा के प्रश्न पहले ही कुछ लोगों तक पहुंच गए थे। लगातार शिकायतों के बीच 12 मई को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने परीक्षा रद्द कर दी और मामले की जांच CBI को सौंप दी। परीक्षा रद्द होने से लाखों छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी फैल गई।

15 मई को तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रेस ब्रीफिंग में पेपर लीक की बात स्वीकार करते हुए कहा कि यह कमांड चेन में हुई एक चूक का परिणाम था। इसके बाद विपक्ष और छात्र संगठनों ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया। छात्रों के भविष्य को देखते हुए 21 जून को दोबारा NEET UG परीक्षा आयोजित की गई। हालांकि परीक्षा दोबारा होने के बावजूद विवाद और आंदोलन शांत नहीं हुआ।

CJP आंदोलन, जंतर-मंतर प्रदर्शन और संसद तक पहुंचा विवाद

मई के मध्य में सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी से प्रेरित होकर अभिजीत दिपके ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) नाम से एक मंच बनाया। शुरुआत में इसे व्यंग्य के रूप में देखा गया, लेकिन बाद में बड़ी संख्या में छात्र और युवा इससे जुड़ते चले गए। 6 जून को CJP ने जंतर-मंतर पर पहला बड़ा प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, परीक्षा प्रणाली में सुधार और प्रभावित छात्रों के लिए न्याय की मांग उठाई। 20 जून से संगठन ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। इसी दौरान सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी आंदोलन से जुड़े और छात्रों के समर्थन में भूख हड़ताल पर बैठे। 21 जून को दोबारा परीक्षा होने के बाद भी आंदोलन जारी रहा। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि केवल दोबारा परीक्षा कराने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और जवाबदेही तय करना जरूरी है।

जुलाई में बढ़ा राजनीतिक दबाव

जुलाई में यह विवाद पूरी तरह राजनीतिक मुद्दा बन गया। 20 जुलाई को CJP ने ‘चलो संसद’ मार्च का आह्वान किया। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने कार्रवाई की, जिसमें लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की खबरें सामने आईं। इसके बाद विपक्ष ने भी सरकार पर हमला तेज कर दिया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे समेत कई विपक्षी नेताओं ने प्रदर्शन किया। विपक्ष की प्रमुख मांगों में शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, पुलिस कार्रवाई की जांच और छात्रों से सार्वजनिक माफी शामिल थी।

इसी दौरान संसद के मॉनसून सत्र में भी NEET विवाद लगातार छाया रहा। विपक्ष ने दोनों सदनों में लगातार हंगामा किया और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई। इस कारण कई बार लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। 23 और 24 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो संदेश जारी कर पेपर लीक के मामलों में कड़ी कार्रवाई, फास्ट ट्रैक कोर्ट और सख्त कानून लाने का भरोसा दिया। 24 जुलाई को केंद्रीय कैबिनेट ने पेपर लीक विरोधी ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दी, जिसमें दोषियों के खिलाफ कठोर सजा और त्वरित सुनवाई का प्रस्ताव रखा गया।

इसी दिन CJP के प्रतिनिधियों सौरव दास और आशुतोष रंका ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से मुलाकात कर आंदोलन से जुड़ी मांगों पर चर्चा की।

25 जुलाई को आया बड़ा राजनीतिक मोड़

लगातार बढ़ते राजनीतिक और सामाजिक दबाव के बीच 25 जुलाई 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही मई में परीक्षा से शुरू हुआ विवाद एक नए राजनीतिक मोड़ पर पहुंच गया। करीब तीन महीने तक चले इस घटनाक्रम में पेपर लीक के आरोप, परीक्षा रद्द होना, दोबारा परीक्षा, CJP का आंदोलन, सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल, संसद में विपक्ष का विरोध, 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई, प्रधानमंत्री के संदेश और पेपर लीक के खिलाफ प्रस्तावित कानून जैसे कई महत्वपूर्ण पड़ाव सामने आए। इस पूरे घटनाक्रम ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधार को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया।

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