रांची में डोमिसाइल आंदोलन के शहीदों को नमन, स्थानीय नीति और जनजातीय भाषाओं पर उठी मांग

रांची : आदिवासी मूलवासी समाज समुदाय के सैकड़ों लोगों ने शुक्रवार को मेकन कॉलोनी स्थित प्रतिमा पर डोमिसाइल आंदोलन के शहीद कैलाश कुजूर, विनय तिग्गा और संतोष कुंकल को माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर शहीदों के योगदान को याद करते हुए उनके

डोमिसाइल आंदोलन

रांची : आदिवासी मूलवासी समाज समुदाय के सैकड़ों लोगों ने शुक्रवार को मेकन कॉलोनी स्थित प्रतिमा पर डोमिसाइल आंदोलन के शहीद कैलाश कुजूर, विनय तिग्गा और संतोष कुंकल को माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर शहीदों के योगदान को याद करते हुए उनके अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प दोहराया गया।

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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बंधू तिर्की ने कहा कि आदिवासी मूलवासी समाज को एक बार फिर झारखंड के अस्तित्व, पहचान, परंपरा और ऐतिहासिक महत्व को मजबूती से सामने लाने की जरूरत है। उन्होंने डोमिसाइल आंदोलन के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि शहीदों के अरमानों को अब तक पूरी तरह धरातल पर नहीं उतारा जा सका है, जो झारखंडियों के लिए आत्ममंथन का विषय है।

शहीद स्मारक समिति के पुनर्गठन का ऐलान

बंधू तिर्की ने घोषणा की कि जल्द ही शहीद स्मारक समिति का पुनर्गठन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि डोमिसाइल आंदोलन के शहीदों के सम्मान में शहीद स्थल पर पारंपरिक शहीद जतरा का आयोजन किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां आंदोलन और शहीदों के योगदान से परिचित हो सकें। उन्होंने लोगों से एसआईआर को प्रमुखता से पूरा करने का भी आह्वान किया। उन्होंने बताया कि एजी मोड़ से कडरू रेलवे ब्रिज तक की सड़क का नाम पहले ही शहीद संचू उरांव के नाम पर रखा जा चुका है और जल्द ही एजी मोड़ पर ‘संचू उरांव पथ’ का बोर्ड लगाया जाएगा।

स्थानीय नीति और जनजातीय भाषाओं की शिक्षा की मांग

पूर्व टीएसी सदस्य एवं झारखंड आंदोलनकारी रतन तिर्की ने कहा कि भाषा आंदोलन, डोमिसाइल आंदोलन का प्रमुख मुद्दा रहा है। उन्होंने मांग की कि झारखंड के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में प्राथमिक स्तर से जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं की पढ़ाई शुरू की जाए। साथ ही स्कूलों और कॉलेजों में कम से कम एक जनजातीय या क्षेत्रीय भाषा का अध्ययन अनिवार्य किया जाए।

रतन तिर्की ने कहा कि खतियानी आदिवासियों और गैर-आदिवासी खतियानी झारखंडियों को एकजुट होकर अपने समाज और संस्कृति की रक्षा के लिए आगे आना चाहिए। आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के अगुआ विजय शंकर नायक ने कहा कि डोमिसाइल आंदोलन के शहीदों के बलिदान को राजकीय सम्मान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि झारखंड गठन के 26 वर्ष बाद भी राज्य में स्थानीय निवासी और स्थानीय नीति को लेकर स्पष्ट व्यवस्था नहीं बन सकी है। उन्होंने सरकार से स्थानीय नीति जल्द तय करने की मांग की।

कार्यक्रम में पूर्व पार्षद सविता कुजूर, केंद्रीय सरना समिति के राज्य अध्यक्ष शिवा कच्छप, पूर्व मेयर प्रत्याशी प्रवीण कच्छप, बेलस तिर्की, सुनील शाहदेव, जस्मीन कच्छप, पार्षद युवा नेत्री शिखा कुजूर, राजेश कच्छप, ज़लील अंसारी, दीपक एक्का सहित अन्य लोगों ने भी शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

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