केरल में पहली बार जेल के अंदर पार्षद ने ली पद की शपथ, हाईकोर्ट के आदेश पर हुई प्रक्रिया

केरल के राजनीतिक इतिहास में पहली बार किसी जनप्रतिनिधि ने जेल के अंदर पद एवं गोपनीयता की शपथ ली।
पार्षद

तिरुवनंतपुरम : केरल के राजनीतिक इतिहास में पहली बार किसी जनप्रतिनिधि ने जेल के अंदर पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। तिरुवनंतपुरम नगर निगम के भाजपा पार्षद आर. सुगाथन ने वियूर सेंट्रल जेल में मेयर वी. वी. राजेश के समक्ष शपथ ग्रहण किया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद जेल परिसर में विशेष व्यवस्था के बीच यह प्रक्रिया पूरी कराई गई।

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आर. सुगाथन फिलहाल केरल एंटी-सोशल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट (KAAPA) के तहत जेल में बंद हैं। इससे पहले हाईकोर्ट ने सुगाथन समेत 20 भाजपा पार्षदों का शपथ ग्रहण अमान्य घोषित कर दिया था, क्योंकि उन्होंने निर्धारित प्रारूप के बजाय अलग-अलग देवी-देवताओं के नाम पर शपथ ली थी। अदालत ने सभी पार्षदों को चार सप्ताह के भीतर दोबारा शपथ लेने का निर्देश दिया था।

अन्य 19 पार्षदों ने समय रहते दोबारा शपथ ले ली, लेकिन सुगाथन 9 जून को KAAPA के तहत जेल भेजे जाने के कारण ऐसा नहीं कर सके। समय सीमा पूरी नहीं होने पर उनकी पार्षद सदस्यता समाप्त होने का खतरा पैदा हो गया। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर शपथ लेने का अवसर देने की मांग की।

राज्य सरकार और पुलिस महानिदेशक ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि प्रिवेंटिव डिटेंशन में बंद व्यक्ति को इस प्रकार की विशेष छूट नहीं दी जानी चाहिए। हालांकि, जस्टिस पी. वी. कुन्हीकृष्णन की एकल पीठ ने लोकतांत्रिक व्यवस्था और मतदाताओं के अधिकारों का हवाला देते हुए जेल के भीतर शपथ ग्रहण की अनुमति दे दी। अदालत ने कहा कि केवल तकनीकी कारणों से किसी निर्वाचित प्रतिनिधि को पद ग्रहण से वंचित करना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत होगा।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद बुधवार सुबह वियूर सेंट्रल जेल में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अदालत ने मान्यता प्राप्त पत्रकारों को भी कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति दी।

शपथ ग्रहण के बाद आर. सुगाथन ने आधिकारिक रूप से अपना पार्षद पद बरकरार रखा। वहीं, मेयर वी. वी. राजेश ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि अब नगर निगम अपना कार्यकाल सुचारु रूप से पूरा कर सकेगा। दूसरी ओर, वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) ने जेल के अंदर शपथ ग्रहण की अनुमति दिए जाने के फैसले की आलोचना की है।

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