INS महेंद्रगिरी भारतीय नौसेना में शामिल, राजनाथ सिंह ने किया कमीशन

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को विशाखापत्तनम डॉकयार्ड में भारतीय नौसेना के अत्याधुनिक युद्धपोत INS महेंद्रगिरी को औपचारिक रूप से कमीशन किया।
INS महेंद्रगिरी

विशाखापत्तनम : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को विशाखापत्तनम डॉकयार्ड में भारतीय नौसेना के अत्याधुनिक युद्धपोत INS महेंद्रगिरी को औपचारिक रूप से कमीशन किया। इसके साथ ही नौसेना के बेड़े में प्रोजेक्ट 17A नीलगिरी क्लास का छठा स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट शामिल हो गया। कमीशनिंग समारोह के दौरान रक्षा मंत्री को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया।

Read More : फिरोजाबाद में डेढ़ साल के आरव हत्याकांड में 41 दिन में फैसला, आरोपी को फांसी

महेंद्रगिरी का नाम पूर्वी घाट की महेंद्रगिरी पहाड़ियों के नाम पर रखा गया है। भारतीय नौसेना का यह पहला युद्धपोत है जिसे यह नाम दिया गया है। इसे लचीलेपन, शक्ति और दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना जा रहा है। उम्मीद है कि यह युद्धपोत भारत के समुद्री इतिहास में अपनी अलग पहचान बनाएगा।

आत्मनिर्भर भारत को मिली नई मजबूती

समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि उन्होंने पहले भी कुरनूल में आठ ड्रोन कंपनियों के समूह द्वारा विकसित किए जा रहे ‘ड्रोन सिटी’ का उल्लेख किया था। उन्होंने कहा कि जिस तरह सूरत को ‘डायमंड सिटी’ और बेंगलुरु को ‘सिलिकॉन वैली’ के रूप में जाना जाता है, उसी तरह भविष्य में यह क्षेत्र देश के ‘ड्रोन हब’ के रूप में पहचाना जाएगा।

Read More : ममता बनर्जी का बड़ा बयान: ‘मुझे चुप कराना है तो मारना होगा’, BJP पर साधा निशाना

उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश आज भारत की रक्षा क्षमताओं में हर क्षेत्र में योगदान दे रहा है। आसमान में एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA), समुद्र की गहराई में भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) के नेवल सिस्टम, बिना पायलट वाले क्षेत्र में कुरनूल के ड्रोन और समुद्र की सतह पर INS महेंद्रगिरी इसका उदाहरण हैं। इस उपलब्धि पर उन्होंने आंध्र प्रदेश सरकार और राज्य के लोगों को बधाई दी।

75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से तैयार

INS महेंद्रगिरी को भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो (WDB) ने इन-हाउस डिजाइन किया है, जबकि इसका निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) ने किया है। यह प्रोजेक्ट 17A स्टील्थ फ्रिगेट श्रृंखला का छठा युद्धपोत है और भारत की स्वदेशी युद्धपोत निर्माण क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस युद्धपोत में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। इसके निर्माण में माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइज (MSMEs) सहित कई भारतीय उद्योगों ने योगदान दिया है, जिससे देश के रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूती मिली है और रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए हैं।

Read More : राम मंदिर चंदा विवाद : स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 13 जुलाई को करेगा सुनवाई

महेंद्रगिरी में अत्याधुनिक स्वदेशी हथियार, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम लगाए गए हैं। यह एंटी-एयर, एंटी-सर्फेस और एंटी-सबमरीन अभियानों के अलावा समुद्री सुरक्षा, सर्च एंड रेस्क्यू, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) और हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) सहित लंबी अवधि की तैनाती के लिए भी सक्षम है। रक्षा मंत्री शुक्रवार शाम विशाखापत्तनम पहुंचे थे, जहां उनका स्वागत नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भी कहा कि INS महेंद्रगिरी का कमीशन होना भारत और भारतीय नौसेना के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने इसे आत्मनिर्भर भारत अभियान, घरेलू रक्षा उद्योग और MSMEs की बढ़ती क्षमता का प्रमाण बताया और कहा कि यह युद्धपोत भारत के समुद्री हितों की रक्षा तथा सुरक्षित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लक्ष्य को और मजबूती देगा।

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now
Facebook
X
Threads
WhatsApp
Telegram
संबंधित खबरें.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *