फिरोजाबाद में डेढ़ साल के आरव हत्याकांड में 41 दिन में फैसला, आरोपी को फांसी

उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले की अदालत ने डेढ़ वर्षीय मासूम आरव की हत्या के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।
आरव

फिरोजाबाद : उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले की अदालत ने डेढ़ वर्षीय मासूम आरव की हत्या के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। शिकोहाबाद की यादव कॉलोनी में एकतरफा प्यार की सनक में मासूम की हत्या करने वाले विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई है। इस मामले में विशेष बात यह रही कि वारदात के महज 41 दिनों के भीतर अदालत ने अपना फैसला सुना दिया।

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पुलिस की तेजी से पूरी हुई जांच

घटना के बाद फिरोजाबाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए केवल छह दिनों के भीतर अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी। मजबूत जांच और प्रभावी पैरवी के चलते मुकदमे की सुनवाई रिकॉर्ड समय में पूरी हुई। ट्रायल के दौरान अदालत में कुल 13 गवाहों की गवाही और वैज्ञानिक साक्ष्य पेश किए गए, जिनके आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए मृत्युदंड सुनाया।

30 मई को हुई थी वारदात

यह घटना 30 मई को शिकोहाबाद क्षेत्र की यादव कॉलोनी में हुई थी। मिली जानकारी के अनुसार पिंकी देवी की पुत्री रति अपनी ससुराल बदायूं में विवाद के चलते अपने डेढ़ वर्षीय बेटे आरव के साथ मायके में रह रही थी। घटना वाले दिन रति अपनी मां की सहेली के घर आई हुई थी। इसी दौरान उसकी फुफुआ सास का बेटा विराज उर्फ जितेंद्र पाठक वहां पहुंचा।

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बताया गया कि आरोपी रति पर शादी का दबाव बना रहा था, लेकिन रति ने उसका प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया था। इसी रंजिश में आरोपी ने आरव को चॉकलेट दिलाने का बहाना बनाकर घर से बाहर ले गया और बीच सड़क पर पत्थरों पर पटक-पटक कर उसकी हत्या कर दी। वारदात के बाद आरोपी फरार हो गया था, जिसे बाद में पुलिस ने एक मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार किया।

अदालत ने माना दुर्लभ से दुर्लभतम मामला

शुक्रवार को सजा सुनाए जाने के दौरान कोर्ट परिसर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे और भारी पुलिस बल तैनात रहा। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों की नजर इस फैसले पर थी। जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने इसे ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ (रेयरेस्ट ऑफ रेयर) श्रेणी का मामला मानते हुए आरोपी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को फांसी की सजा सुनाई।

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